अमरोहा। साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। साइबर ठग ने किसान को फोन कर खुद को उनका परिचित होने का विश्वास दिलाया। खाते में रुपये भेजने का झांसा दिया और मोबाइल नंबर और एटीएम कार्ड का नंबर व ओटीपी पूछ लिया। बाद में किसान के खाते से 44 हजार रुपये उड़ा लिए। ठगी का अहसास होने पर किसान के होश उड़ गए। पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दे दी है। पुलिस ने मामला साइबर सेल को सौंपा है।
यह मामला डिडौली कोतवाली क्षेत्र के कटाई गांव का है। यहां पर रहने वाले जयविंद्र सिंह पेशे से मध्यम वर्ग के किसान है। आरोप है कि शनिवार की सुबह उनके पास मोबाइल पर 8099216076 नंबर से कॉल आई थी। साइबर ठग ने खुद को देहात थानाक्षेत्र के कैलसा बार्डर पर स्थित शर्मा मेडिकल स्टोर का मालिक बताया। कहा कि वह कैलसा बार्डर से मेडिकल वाले शर्मा जी बोल रहे हैं...। कहा कि वह तुम्हारे खाते में 20 हजार रुपये डलवा रहे हैं, बाद में निकाल कर दे देना। क्योंकि कैलसा बार्डर और कटाई गांव आस-पास ही है। इसलिए पीड़ित किसान ने भी ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। ठग ने कहा कि एटीएम कार्ड का नंबर मोबाइल पर आने वाला ओटीपी बता दें। मोबाइल पर जैसे ही ओटीपी आया तो किसान ने तुरंत बता दिया। इसके दो मिनट बाद ही उनके खाते से 44 हजार रुपये कट गए। मोबाइल पर रुपये कटने का एसएमएस देखा कर किसान के होश उड़ गए। उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो पहले तो बैंक जाकर खाते के लेनदेन पर रोक लगवाई। बाद में कैलसा बार्डर जाकर शर्मा मेडिकल स्टोर की जानकारी की। लेकिन यहां इस नाम से कोई मेडिकल स्टोर नहीं था। बाद में पीड़ित डिडौली कोतवाली पहुंचे और तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। इंस्पेक्टर मोहित चौधरी ने बताया कि तहरीर मिल गई है। प्रकरण की जांच साइबर सेल को सौंपी गई है।
साइबर ठगी का शिकार होने से बचाव
. ठगी से बचने के लिए प्रतिष्ठित वेबसाइट से ही करें शॉपिंग
. कैश ऑन डिलीवरी मंगाएं प्रोडक्ट
. सस्ते उत्पाद या इनाम के लालच में भी ऑनलाइन बुकिंग करने से बचें
. वेबसाइट की हेल्पलाइन और डिलीवरी मैन का मोबाइल नंबर जरूर लें
. एचटीटीपीएस साइट से ही बुकिंग कर क्रेडिट या डेबिट कार्ड से करें भगुतान
. ऑनलाइन खरीदे उत्पाद की पॉलिसी के बारे में जानकारी करें
. आप अपने कंप्यूटर में अगर इंटरनेट का प्रयोग करते हैं तो सबसे पहले आप अपने पर्सनल कंप्यूटर को पासवर्ड से सुरक्षित कीजिए।
. हमेशा बहुत स्ट्रांग पासवर्ड का प्रयोग करें। क्योंकि साइबर क्रिमिनल प्रोग्रामर ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का निर्माण करते हैं जो आपके साधारण से पासवर्ड को आसानी से गेस कर सकता है।
. अगर आप एक से अधिक अकाउंट्स का प्रयोग करते हैं तो सभी के लिए अलग-अलग पासवर्ड का प्रयोग करें।
. अपना पासवर्ड कभी भी अपने नाम, पता, गली नंबर, जन्म तिथि, परिवार के सदस्यों के नाम, विद्यालय के नाम या अपने वाहनों के नंबर पर न बनाएं जिसका दूसरों के द्वारा आसानी से अनुमान न लगाया जा सके।
. अपने इंटरनेट बैंकिंग और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक स्थान जैसे कि साइबर कैफे, ऑफिस, पार्क, सार्वजनिक मीटिंग और किसी भीड़-भीड़ वाले स्थान पर न करें।
. किसी भी प्रकार के बैंकिंग लेनदेन के लिए आप अपने पर्सनल कंप्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल करें।
. बैंकिंग यूजर नेम, लॉगिन पासवर्ड, ट्रांजक्शन पासवर्ड, ओटीपी, गोपनीय प्रश्नों या गोपनीय उत्तर को अपने मोबाइल, नोटबुक, डायरी, लैपटॉप या किसी कागज पर न लिखें।
. ई-मेल के द्वारा कभी भी आप अपने गोपनीय और महत्वपूर्ण जानकारी को न भेजें क्योंकि हैकर्स हैक कर इस जरूरी दस्तावेज को बीच में पढ़ भी सकते हैं।
. सोशल मीडिया के अकाउंट को देखते रहें। अगर कभी आप अपने सोशल साइट्स के अकाउंट को डिलीट कर रहे हैं तो उससे पहले आप अपनी सारी पर्सनल जानकारी को डिलीट कर दें और फिर उसके बाद आप अपना अकाउंट डीएक्टिवेट करें या डिलीट करें।
. आप किसी भी स्पैम ई-मेल का उत्तर न दे। अंजान ई-मेल में आए अटैचमेंट्स को कभी खोल कर न देखें या उस पर मौजूद लिंक पर क्लिक न करें।
. अज्ञात व्यक्ति को अपना एटीएम कार्ड नंबर, पिन नंबर और ओटीपी शेयर न करें।
ठगी होने पर यहां दे जानकारी
. 100 नंबर
. नजदीकी थाने पर
. एसपी/एसएसपी कार्यालय
. साइबर सेल