देहात थाना क्षेत्र के गांव हाशमपुर निवासी रोहताश पुत्र रिसाल सिंह और गांव के ही सोरन सिंह के बीच जमीन का सौदा हुआ था। रोहताश ने उसे बीस हजार रुपये एडवांस भी दे दिए थे, लेकिन जागन सिंह के कहने पर सोरन सिंह ने एडवांस लिए रुपये रोहताश को लौटा दिए।
इसको लेकर रोहताश जागन सिंह से रंजिश मानने लगा। आरोप है कि, 26 अगस्त 2006 को रोहताश और उसका साथी लाला पुत्र हरपाल निवासी गंदूपाल (थाना बछरायूं) कांठ रोड स्थित पुरानी ट्रेजरी के दफ्तर के सामने घात लगाकर बैठ गए। शाम करीब सवा छह बजे जब जागन सिंह पुरानी ट्रेजरी के सामने पहुंचा तो रोहताश व लाला ने उसे गोली मार दी और मौके से फरार हो गए।
गोली लगने से जागन सिंह की मौके पर मौत हो गई। मृतक के भाई ऋषिपाल सिंह की तहरीर पर रोहताश व लाला के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामला अदालत में विचाराधीन था। दोनों कुछ समय बाद जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आ गए।
शुक्रवार को विशेष सत्र एवं अपर जिला जज बीडी भारती ने मामले की सुनवाई की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र सिंह सैनी और बचाव पक्ष के वकील की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने रोहताश व लाला पर हत्या का दोष सिद्घ किया और आजीवन कारावास व पचास-पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया है।
भाई की हत्या के बाद परिवार बुरी तरह टूट चुका था। जागन सिंह मेरा छोटा भाई था और उसे न्याय दिलाना मेरा मकसद बन गया था। फैसला आने में दस साल लग गए। अदालत पर पूरा भरोसा था। हत्यारों को उम्र कैद की सजा से संतुष्ट हूं।
-ऋषिपाल सिंह, मृतक का बड़ा भाई