अमरोहा। कोरोना संक्रमण को आए एक साल बीत गया। संक्रमण की चपेट में जिले के हजारों लोग आए तो कुछ ने जान भी गवां दी। लोगों को संक्रमण से बचाने के प्रधानमंत्री ने लाकडाउन घोषित कर दिया तो मानों पूरा देश थम गया। भागदौड़ भरी जिंदगी में यह ब्रेक लोगों के दिलों में खौफ पैदा कर था। उद्योग धंधे चौपट हो गए। कई ने नौकरी से हाथ धोया। कोरोना था कि एक-एक कर लोगों को अपनी चपेट में ले रहा था। हालांकि लोगों ने कोरोना को हराया और फिर से अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद में लग गए। आज इन लोगों का कहना है कि कोरोना से डरे नहीं, लेकिन सावधानी अवश्य बरतें, क्योंकि कोरोना फिर से पैर फैला रहा है। कोरोना की वैक्सीन जरूर आ गई है, लेकिन अभी सभी लोगों को इससे बचाव का टीका नहीं लग पाया है। ऐसे में सावधानी ही एक बचाव हैं। कोरोना की चपेट में आकर वापस अपना कार्य शुरू करने वाले कुछ लोगों ने अमर उजाला ने बात की।
हॉट स्पॉट में पैदल गुजरें, नहीं किया आराम, घरों में बांटें अखबार
अमरोहा। पिछले वर्ष मार्च में ही कोरोना के दौरान कई ऐसे लोग रहे जिन्होंने कोरोना के बढ़ते मामले के बावजूद ड्यूटी का बखूबी निर्वहन किया। इसमें समाचार पत्र वितरक सबसे आगे रहे। यह लोग रोजाना शहर के कटरा मोहल्ले से पेपर का उठान किए। उसके बाद समाचार पत्र के वितरण में जुट गए। हॉट स्पॉट के बढ़ते इलाके के बाद भी इनके कदम नहीं रुकें। यह लोग मास्क लगा कर साइकिल को किनारे खड़ी करते और दरवाजे के अंदर पेपर को रखने के बाद दूसरे जगह के लिए निकल जाते। कई लोग सुबह में समाचार पत्र का इंतजार करते थे। अखबार मिलन- के बाद लोगों को सब कुछ सही होने का आभास होता था। कोरोना काल में बिना भय के काम करने वाले समाचार पत्र वितरकों की जुबानी दे रहे हैं।
कोरोना संक्रमण के दौरान समाचार पत्र का वितरण किए। कोई छुट्टी नहीं लिया। मास्क लगा कर काम किए। रोजाना सुबह कटरा मोहल्ले में पहुंच जाता था। वहां से पेपर लेने के बाद विभिन्न मोहल्लों में पेपर बांटने निकल जाते थे। रामू सैनी, पीरगढ़
लॉक डाउन के दौरान हॉट स्पॉट में समाचार पत्र के वितरण में दिक्कत आती थी। पैदल गुजरते थे। इसके बाद लोगों के घरों में पेपर बांटा। लोगों को अखबार का इंतजार रहता। अखबार को हाथों में लेकर हाल चाल भी पूछते। लकी पाल, बेगम सराय
मास्क लगा कर पेपर बांटते थे। कई बार तो रात दो बजे उठ जाते थे। सीधे कटरा गुलाम अली में पहुंचतें तब तक पेपर आ जाती थी। इसके बाद अखबार का बंडल लेकर मोहल्लों में निकल जाते। कई लोग घर के बाहर पेपर का इंतजार करते थे। डोरी लाल, जय ओम नगर
लॉक डाउन में लोगों के घरों में पेपर बांटते थे। साइकिल खड़ी कर पैदल बांटते थे। कई लोगों ने चाय पीने की गुजारिश की लेकिन इसके लिए परहजे किए। खुद को बचाना और दूसरों को सुरक्षित रखना प्राथमिकता रखे। वहाज, समाचार पत्र वितरक कटकुई।
-कोरोना काल में कई बार अखबार बांटते समय डर लगने लगा था। लेकिन फिर धीरे-धीरे कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते हुए कदम आगे बढ़ते गए। कोरोनाकाल हमेशा याद रहेगा। हसनपुर के मोहल्ला राजपूत कालोनी निवासी समाचार पत्र वितरक उमेश शर्मा
- कोरोना काल में जब सुबह में अखबार बांटने के लिए घर से निकलते थे, घरवाले घर से निकलने के लिए मना करते थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और मुंह पर गमछा बांधकर लोगों के घर अखबार पहुंचाने का कार्य किया, ताकि लोग देश दुनियां में हो रही घटनाओं के बारे में सही तरह से जान सकें।
हसनपुर निवासी समाचार पत्र वितरक चंद्रभान सिंह
-कोरोना काल में कई मोहल्लों में कोरोना के मरीज आने की वजह से नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया गया था। ऐसी जगहों पर अखबार पहुंचाने में परेशानी और डर महसूस हुआ। लेकिन फिर धीरे-धीरे से इससे उबर सके। कोरोना काल को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
हसनपुर निवासी समाचार पत्र वितरक राजू कुमार