अफसरों की उदासीनता के चलते गजरौला में सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) का कार्यालय नहीं बन रहा है। खुद की एक हजार वर्ग गज भूमि होने के बावजूद सीजीएसटी का कार्यालय किराए के भवन में चल रहा है। उधर, भवन निर्माण के लिए शासन से मिले ढाई करोड़ रुपये भी वापस हो गए।
सीजीएसटी के अमरोहा और गजरौला में दो क्षेत्रीय कार्यालय हैं। जबकि, मेरठ में इसका मुख्य कार्यालय है। गजरौला कार्यालय 11 हजार रुपये प्रति माह किराए के भवन में चल रहा है। वहीं, अमरोहा का कार्यालय भी किराए के भवन में चल रहा है। उसका किराया भी 33 हजार रुपये प्रति माह है। दोनों का साल भर का किराया 5.28 लाख रुपये बनता है। यह हालत तब हैं, जब गजरौला में कार्यालय के लिए एक हजार वर्ग गज भूमि भी उपलब्ध है। इसके निर्माण के लिए ढाई करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो गए। मगर, विभाग के अफसरों ने कार्यालय का भवन बनवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसके चलते शासन की ओर से जारी ढाई करोड़ रुपये भी वापस हो गए।
सीजीएसटी गजरौला के अधीक्षक निशान सिंह का कहना है कि कार्यालय का भवन निर्माण के लिए ढाई करोड़ रुपये उनसे पहले ही आए थे। भवन का निर्माण नहीं होने पर स्वीकृत की गई धनराशि भी वापस कर दी गई। अपना भवन बन जाता तो विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के सामने आ रही दिक्कत दूर होती। साथ ही उनका काम भी प्रभावित नहीं होता। उद्यमियों को भी खासी सहूलियत मिलतीं।
औद्योगिक क्षेत्र में है एक हजार वर्ग गज का प्लॉट
गजरौला। नगर के औद्योगिक क्षेत्र में छोटी और बड़ी कई औद्योगिक इकाई हैं। जिनके कारण सीजीएसटी के कार्यालय की दशकों पूर्व जरूरत महसूस की गई। जिससे फर्म और औद्योगिक इकाइयों को अपना पंजीकरण कराने में परेशानी का सामना न करना पड़े। मगर अफसरों ने भवन निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखाई। बीते दिनों आए विभाग के वरिष्ठ अफसर ने निशान सिंह से जानकारी ली कि अभी तक अपनी भूमि होने के बावजूद अपना भवन क्यों नहीं बनाया गया।