मूलभूत सुविधाओं के लिए यहां की जनता तरस रही है, लेकिन जनप्रतिनिधि वोट लेने के बाद भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
नगर पालिका परिषद के परिसीमन के बाद करीब दस साल पहले सुबोधनगर, पुष्करनगर, अर्जुन विहार, आवास विकास प्रथम व द्वितीय, प्रतापनगर, शकूरनगर की मढैया, खालसा, बदावाला, बदावाला की मढैया, प्रीत विहार, रानीनगर आदि मोहल्लों को वार्ड 17 में शामिल किया गया था।
इस वार्ड को खालसा का नाम दिया गया। यहां के लोगों के नगर क्षेत्र के मतदाता की पहचान रखते हैं। बावजूद इसके सुबोधनगर के एक हिस्से (बदावाला की मढैया) को पालिका आज स्वीकार नहीं कर पाई है। हालांकि लोगों के वोटर कार्ड पर सुबोधनगर अंकित है। लेकिन यह इलाका पालिका के नक्शे में दर्ज नहीं है।
लोगों ने जब इस क्षेत्र में विकास कराने के लिए संघर्ष किया, तो पता चला कि यह हिस्सा सुबोधनगर में तो है, लेकिन सुबोधनगर पालिका की सीमा में ही नहीं है। जबकि विकास खंड अमरोहा इसे पालिका का हिस्सा मानता है। यहां के लोग पालिका और ब्लाक से मिले जवाब को लेकर हैरत और टेंशन में हैं।