अमरोहा। 21 जुलाई को दूसरा सोमवार व 23 जुलाई को शिवरात्रि है। अमरोहा शिवभक्ति में डूबा नजर आ रहा है। चारों ओर बोले बम और हर-हर महादेव का उद्घोष है तो वहीं, कांवड़ियों के पैरों के घुंघरू की आवाज सुनाई दे रही है। कांवड़िये उत्साह, जोश और श्रद्धा संग भगवान शिव के जयकारे लगाते अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।
सावन माह के दूसरे सोमवार व 23 जुलाई को शिवरात्रि के मद्देनजर रविवार को दिल्ली हाईवे और अन्य मार्गों से कांवड़िये गुजरते रहे। शिवभक्त अपने कांधे पर कांवड़ रख बम भोले के जयकारों के साथ आगे बढ़ते दिखे। उधर, पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रहा। जलाभिषेक के लिए मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया है। इनमें सोमवार को तड़के से ही जलाभिषेक शुरू हो जाएगा।
मंदिरों में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुबह से ही मंदिरों पर जलाभिषेक करने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगना शुरू हो गईं। सावन माह का दूसरा सोमवार 21 जुलाई को है। ऐसे में कांवड़ियों के जत्थे रविवार को बड़ी संख्या में हाईवे सहित अन्य मार्गों से गुजरते रहे। हाईवे पूरी तरह से केसरिया रंग में रंगा नजर आया।
दिल्ली हाईवे पर ब्रजघाट से अमरोहा के अलावा बदायूं, संभल, मुरादाबाद, बरेली के अलावा बुलंदशहर आदि जिलों के कांवड़िये गंगाजल लेकर लौटते हैं। वहीं, हरिद्वार से भी गंगाजल लेकर कांवड़िये अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना होते रहे। रविवार को हाईवे पर हर-हर महादेव व बम-बम करते हुए कांवड़िये अपनी मंजिल की ओर बढ़ते रहे।
सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात
सुरक्षा के लिहाज से हाईवे से लेकर अन्य मार्गों पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क रहा। हाईवे पर एक लेन कांवड़ियों के नाम रही। कांवड़ियों की संख्या के चलते जगह-जगह जाम के हालात भी नजर आए। हरिद्वार से कांवड़ ला रहे कांवड़ियों के चलते बिजनौर मार्ग पूरी तरह से केसरिया रंग में नजर आया। जहां कुछ कावंड़िये कंधों पर कलश में जल ला रहे थे तो वहीं, कुछ डाक कांवड़िये बाइक व अन्य वाहनों पर चल रहे थे। भगवान शिव के भजनों पर कांवड़िये थिरकते हुए चल रहे थे।
मंदिरों में शिवभक्तों के ठहरने के लिए भी किए गए है इंतजाम
रविवार देर शाम वासुदेव तीर्थ, बाबा गंगानाथ मंदिर समेत अन्य मंदिरों पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए इंतजाम किए गए हैं। सोमवार को जलाभिषेक के साथ-साथ शिवरात्रि पर भी जल लेने के कांवड़ियाें के हरिद्वार से लौटना शुरू हो गया है। वहीं, ब्रजघाट से जल लेकर कांवड़िये धीरे-धीरे अपने गंतव्यों की ओर रवाना होते रहे। कांवड़ियों के लिए जगह-जगह सेवा शिविरों का आयोजन किया गया। जहां उनकी सेवा होती रही।