बारह साल पहले फावड़े से हमला कर भाभी की हत्या करने के मामले में कोर्ट ने दोषी देवर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। हत्याकांड में शामिल पति और तांत्रिक समेत चार दोषियों को आठ साल पहले उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। गिरफ्तारी के बाद से ही दोषी देवर जेल में बंद है।
यह घटना हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला लाल बाग बंजारन कुआं पर हुई थी। यहां रहने वाले अब्दुल जब्बार की बेटी नसीमा उर्फ मुनिया की शादी मोहल्ले के रहने वाले यामीन उर्फ मूल के साथ हुई थी। इसके बाद यामीन नसीमा को लेकर मोहल्ला मुबारिकपुर में किराए के मकान में रहता था। 13 जून 2013 दोपहर 12 बजे मोहल्ला लाल बाग के रहने वाले तांत्रिक हयात के कहने पर पति यामीन और इसके परिवार वाले अली जान उर्फ मलुवा, खालिद, खलील नसीम ने देवर इरशाद को नसीमा की हत्या करने के लिए उकसाया था। इसके बाद इरशाद ने फावड़े से हमला कर भाभी नसीमा की हत्या कर दी।
यह घटना मकान मालिक व अन्य लोगों ने देखी। मामले में मृतक नसीमा के चाचा गफ्फार की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस समय इरशाद ने खुद को नाबालिग बताते हुए वकील के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, जिसके चलते इरशाद की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड में प्रेषित की गई।
पति और तांत्रिक समेत चार दोषियों को आठ साल पहले हो चुकी सजा
कोर्ट ने 17 जुलाई 2017 को तांत्रिक हयात, विवाहिता के पति यामीन, अलीजान व खलील को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में कोर्ट ने मुख्य आरोपी इरशाद को नाबालिग मानने से इन्कार कर दिया। जिसके चलते आरोपी इरशाद की अपील खारिज हो गई थी। फिलहाल इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट द्वितीय अरविंद कुमार शुक्ला की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल पैरवी कर रहे थे। मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमा में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों व सबूताें के आधार पर आरोपी इरशाद को दोषी करार दिया। साथ ही उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।