अरबों की अमरोहा की चीनी मिल को माया सरकार में कौड़ियों के भाव में बेच दिया गया था। बसपा शासनकाल में करीब 600 बीघा जमीन वाली इस चीनी मिल को मात्र 17 करोड़ रुपये में पोंटी चड्ढा ग्रुप को बेचा गया था। दो करोड़ साठ लाख रुपये का स्टांप शुल्क भी 17 करोड़ रुपये में शामिल है।
बेचने के विरोध में शुगर मिल पर किसान धरना और प्रदर्शन करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री मायावती का दिल नहीं पसीजा। अमरोहा की जगह लखनऊ में ही बैठे-बैठे रजिस्ट्री वेव के नाम करा दी गई। पोंटी चड्ढा के करीबी उत्तराखंड के इंदर सिंह नामधारी ने दबंगई के साथ हथियारों के बल पर किसानों को खदेड़कर, पोंटी चड्ढा ग्रुप का कब्जा करा दिया था।
अब जब भाजपा सरकार ने बसपा शासनकाल में बेची गई चीनी मिलों के जांच के आदेश दिए हैं, तो अमरोहा की कुंदन शुगर मिल भी जांच के दायरे में आ सकती है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2007 में पूर्ण बहुमत सरकार बनाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश की 21 सहकारी चीनी मिलों को बेचने का निर्णय लिया था।
अमरोहा जनपद में दि किसान सहकारी चीनी मिल गजरौला हसनपुर और कुंदन शुगर मिल अमरोहा समेत दो सहकारी चीनी मिलें थीं। 36 एकड़ में फैली कुंदन शुगर मिल के पास 350 बीघा जमीन और थी। वर्ष 2010-11 में मुख्यमंत्री मायावती ने कुंदन शुगर मिल को पोंटी चड्ढा को बेचने की ठान ली।
तत्कालीन डीएम और डीसीओ सहित अन्य अधिकारियों ने शुगर मिल की अमरोहा तहसील में रजिस्ट्री करने से माना कर दिया था। अधिकारियों से नाराज मायावती ने लखनऊ स्थित तहसील में बैठे-बैठे रजिस्ट्री करा दी।
मुख्यमंत्री के इस फैसले से नाराज भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया था। पोंटी चड्ढा के करीबी इंदर सिंह नामधारी के साथ हथियारों से लैस 80 गाड़ियों में सवार होकर लोग शुगर मिल के गेट पर पहुंचे थे। विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को धमकाते हुए खदेड़ दिया था।