लाठी-डंडों से लैस ग्रामीणों ने तेंदुए को घेर लिया था। वन विभाग की टीम ने भी तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल लगाया लेकिन तेंदुआ जाल से बचकर गन्ने के खेत में भाग निकला था। इसके बाद ग्रामीणों ने तेंदुए को घेर लिया और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। यह सब वन विभाग के अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में हुआ। पिटाई के बाद तेंदुआ अचेत अवस्था में जमीन पर गिर पड़ा था। लिहाजा वन विभाग के अधिकारी तेंदुए को कब्जे में लेकर डीएफओ कार्यालय पहुंचे, जहां पशु चिकित्सक को बुलाकर उसका उपचार शुरू कराया गया।
बुधवार की देर रात वन दरोगा केपी सिंह ने ढक्का निवासी प्रदीप कुमार, भोला उर्फ सतवीर, कलुवा, याहियापुर निवासी किरनपाल, कपिल, रोहताश, मखदूमपुर निवासी संजीव, रोहताश यादव, मोनू, करतार सिंह, माडी उर्फ मोनू को नामजद और 100-150 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ तेंदुए को लाठी-डंडे से पीटकर चोट पहुंचाने, वन दरोगा के साथ मारपीट व उनकी निजी कार में तोड़फोड़ करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई है।
इंस्पेक्टर शैलेंद्र चौहान ने बताया कि आरोपी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर चालान कर दिया गया है। अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। वहीं अज्ञात ग्रामीणों की पहचान फोटो और वीडियो के आधार पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले में आईपीसी की धारा 147,186, 323, 353, 332, 427 और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम धारा 9/39/51 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
ग्रामीणों की पिटाई के बाद घायल तेंदुए की हालत में पहले से काफी सुधार हुआ है। पशु चिकित्सक टीम की देखरेख में तेंदुए का इलाज सही चल रहा है। इसलिए उसके बिल्कुल स्वस्थ होने तक उसे जटी वन स्थित कार्यालय पर ही रखा जाएगा।
- देवमणि मिश्र, डीएफओ
मादा है तेंदुआ, पौन दो साल है उम्र
डीएफओ देवमणि मिश्र ने बताया कि मखदूमपुर गांव में ग्रामीणों की पिटाई से घायल तेंदुआ मादा है। उसकी उम्र करीब पौने दो साल है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में और भी तेंदुए हो सकते हैं। लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। बेवजह तेंदुए को न छेड़ें। वरना वह हमलावर हो सकते हैं।