अमरोहा के बावनखेड़ी गांव में 13 साल पहले 14/15 अप्रैल की रात एक ऐसा भयावह हादसा हुआ जो वहां के लोगों के जहन में आज भी एक खौफनाक याद की तरह है। उस रात से एक नाम जुड़ा है शबनम। तब से लेकर आज इस खबर के लिखे जाने तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली कि उस गांव में किसी ने भी अपनी बच्ची का नाम शबनम रखा हो। इस नाम से न सिर्फ बावनखेड़ी गांव बल्कि आसपास के कई गांव के लोग खौफ खाते और नफरत करते हैं। जानिए क्या है शबनम नाम से उस गांव के खौफ और नफरत की वजह....
बात है 14/15 अप्रैल 2008 के दरम्यानी रात की। उस रात एक ही परिवार के सात सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। ये गांव शबनम के नाम से अब भी खौफ खाता है और नफरत करता है। बावनखेड़ी हत्याकांड के 13 साल बाद भी गांववाले अपनी बेटियों का नाम शबनम रखने को तैयार नहीं है। गांव वाले ही नहीं, आसपास के गांवों के लोग भी जल्द से जल्द शबनम की फांसी का इंतजार कर रहे हैं।
बावनखेड़ी के ग्राम प्रधान मोहम्मद नबी का कहना है कि वर्ष 2008 में बावनखेड़ी कांड के समय गांव में कई बेटियों का नाम शबनम था। अधिकांश बेटियों की शादी हो चुकी है। शबनम नाम की चार पांच बेटियां होंगी। घटना के बाद गांव में किसी बच्ची का नाम शबनम नहीं रखा गया है। शबनम नाम जुबां पर आते ही खौफनाक रात की वारदात ताजा हो जाती है।
शबनम का नाम लेते ही गांव वालों को खौफनाक रात की याद आ जाती है, जिसमें गांव के मास्टर शौकत के हंसते-खेलते परिवार को मौत की नींद सुला दिया गया। एक के बाद एक परिवार के सात सदस्यों को कुल्हाड़ी से वार कर मौत के घाट उतार दिया गया।
इस घटना को अंजाम किसी और ने नहीं बल्कि मास्टर शौकत की शिक्षामित्र बेटी शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दिया था। हसनपुर कस्बे से सटे छोटे से गांव बावनखेड़ी की शिक्षामित्र शबनम ने 14/15 अप्रैल 2008 की रात को प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, भतीजे अर्श और फुफेरी बहन राबिया का कुल्हाड़ी से वार कर कत्ल कर दिया था।
‘फांसी में कतई देरी न हो‘
गांव के पूर्व प्रधान फुरकान का कहना है कि इतने साल हो गए आज भी लोग इस घटना को नहीं भूल पाए हैं। अब इसे नफरत कहिए या खौफ गांव के लोग अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखना चाहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शबनम की फांसी में अब कतई देरी नहीं होनी चाहिए यदि फांसी से भी बड़ी कोई सजा हो तो वह शबनम को मिलनी चाहिए। शबनम के ही घर के सामने रहने वाले इंतजार अली कहते हैं, उस घटना के बाद बावनखेड़ी के किसी भी घर में बेटी का नाम शबनम नहीं रखा है। उनका कहना है कि वह खौफनाक मंजर आज भी सामने आ जाता है। घर में सात लोगों की कब्र आज भी उस घटना की गवाही देती है।