अपने परिवार के खात्मे की दोषी शबनम को मथुरा में फांसी की तैयारी की जानकारी से बावनखेड़ी के ग्रामीणों में कोई मलाल नहीं है, बल्कि खुशी है। ज्यादातर का कहना है कि अपनों के खून से हाथ रंगने वाली शबनम और उसके प्रेमी सलीम को बहुत पहले ही फांसी लग जानी चाहिए थी। अब बिना देरी दोनों को फांसी दी जाए।
लोगों ने कहा...
जावेद का कहना है कि उस कांड के बाद से शबनम नाम से ही नफरत हो गई है। उसका नाम सुनना भी कोई पसंद नहीं करता। शबनम को मथुरा में फांसी पर लटकाने की तैयारियों की जानकारी मिली तो बहुत सुकून मिला है।
शाहबुद्दीन का कहना है कि यदि अब भी शबनम को फांसी दिया जाना दूसरे अपराधों के लिए नजीर बनेगा। ऐसा जघन्य अपराध करने वालों को शीघ्र फांसी दे देनी चाहिए।
शफीक का कहना है कि शबनम में अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर गांव को कलंकित कर दिया। उसे जिंदा रहने का कोई हक नहीं है। उसे जल्द फांसी पर लटकाना चाहिए।
उजैर का कहना है कि शबनम को फांसी पर लटकाए जाने का इंतजार ग्रामीण वर्षों से कर रहे हैं। अब इंतजार खत्म होता नजर आ रहा है।
चाचा-चाची ने भी कोसा शबनम को
बाबनखेड़ी में रह रहे शबनम के चाचा सत्तार अली का कहना है कि शबनम को बहुत पहले ही फांसी पर लटका देना चाहिए था। अब तक उसे क्यों फंदे पर नहीं लटकाया गया। इस बात का मतलब समझ नहीं आता। सत्तार अली की पत्नी फात्मा का कहना है कि हत्याकांड के बाद शबनम को इतने वर्ष तक जिंदा रहने का कोई हक नहीं है। उसे जल्द से जल्द फंदे पर लटका देना चाहिए।