अमरोहा। ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में परिजनों को जेल भेजने वाले षड्यंत्रकारी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जिसमें नौ पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। आरोप है कि आरोपी पुलिसकर्मियों पीड़ित परिवार पर फैसले का दबाव बना रहे हैं। पुलिस कर्मियों से जान-माल का खतरा बना हुआ है। परिवार के साथ कोई अनहोनी हुई तो इसका जिम्मेदार जिला प्रशासन होगा। पीड़ित किसान ने डीएम से मुलाकात कर पुलिस की वजाय प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की गुहार लगाई है। साथ ही आरोपी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को पीड़ित किसान कलक्ट्रेट पहुंचा। यहां डीएम बीके त्रिपाठी को शिकायती पत्र देकर बताया कि उसकी नाबालिग बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। इस मामले में बेटे ने शक के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ बहन के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस दौरान तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने पिता, भाई और रिश्तेदार को ही ऑनर किलिंग का मुजरिम बना दिया था। वह भी उस अपराध में जो हुआ ही नहीं। पुलिस ने 29 दिसंबर 2019 को तीनों की गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेज दिया था। लॉकडाउन के दौरान 7 अगस्त 2020 को बेटी अपने प्रेमी पति के घर जीवित मिल गई थी। निर्दोष होने के बाद भी पिता को 11, भाई को 9 और रिश्तेदार को 15 महीने जेल में गुजारने पड़े थे।
जेल से छूटने के बाद न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा सहित 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। करीब डेढ़ महीने बाद भी आरोपी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। आरोपी पुलिस कर्मी फैसले के लिए दबाव बना रहे हैं। पुलिस कर्मियों से परिवार को जान-माल का खतरा बना हुआ है। पीड़ित किसान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार जिला प्रशासन होगा। ऐसे स्थिति में पुलिस से जांच में निष्पक्षता की उम्मीद नहीं हैं। इसलिए प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए। साथ ही आरोपी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार किया जाए।