अमरोहा। शहर के मोहल्ला शफाअत पोता स्थित हुसैनी हॉल में सोमवार रात पैगम्बरे-ए-इस्लाम की विलादत के सिलसिले में ऑल इंडिया महफिल-ए-नूर का आयोजन किया गया। महफिल में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे उलेमाओं और शायरों ने शिरकत की। उलेमाओं ने सीरत-ए-नबवी के पैगाम से लोगों को रूबरू कराया, जबकि शायरों ने बारगाह-ए-रिसालत में नातिया कलाम पेश किए।
महफिल की शुरुआत कारी मिकदार हुसैन और कारी मोहम्मद इब्राहिम ने तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से की। ईरान कल्चरल हाउस दिल्ली से आए डॉ. हकीम मजीद इलाही ने सीरत-ए-नबवी की मअनवियत और इंसानियत के लिए उसके आलमी पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.व.) की जात-ए-गिरामी पूरी इंसानियत के लिए रहमत का पैगाम है और मौजूदा दौर की अखलाकी व सामाजिक समस्याओं का समाधान सीरत-ए-नबवी की तालीम पर अमल करने में है। दारुल उलूम मसूदिया अजीजुल उलूम, बहराइच शरीफ के नाजिम मुफ्ती नूरुल ऐन मिस्बाही ने भी सीरत-ए-नबवी के विभिन्न पहलुओं पर खिताब किया। पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली ने इत्तेहाद और भाईचारे पर जोर दिया।
महफिल में प्रोफेसर शम्सुल हसन शम्स फैजाबादी, असगर एजाज काएमी, मीर नजीर बाकरी, जौहर शिकारपूरी, मुजाहिद मकसूदपूरी, कौसर संभली, जीशान हैदर, डॉ. आबिद, वारिस वारसी, प्रोफेसर नाशिर नकवी और नौशा अमरोहवी ने नातिया कलाम पेश किए। महफिल की अध्यक्षता मौलाना डॉ. शहवार हुसैन ने की, जबकि संचालन अर्शी वास्ती और मूसा रजा अमरोहवी ने संयुक्त रूप से किया।