अमरोहा। जनपद में 633 बच्चे कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। जबकि कुपोषित बच्चों की पहचान के अभियान चलाए जाते हैं। आगंनबाड़ी वर्कर और आरबीएफके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के माध्यम से बच्चों की पहचान करके अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। लगातार प्रयासों के बाद भी कुपोषण की समस्या कम नहीं हो रही है।
बच्चों की देखभाल के लिए जिला अस्पताल में एक विशेष वार्ड बना रखा है, जिसमें कुपोषित बच्चों को 14 दिन तक भर्ती करके उपचार दिया जाता है। जनपद में कुपोषण एक बड़ी चिंता बनकर उभर रहा है, जहां 540 बच्चे कुपोषण और 93 बच्चे अतिकुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं। इन बच्चों के बेहतर इलाज और पोषण सुधार के लिए जिला अस्पताल में न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) वार्ड संचालित किया जा रहा है, जहां बच्चों को 14 दिन तक भर्ती कर विशेष देखभाल दी जाती है। वर्तमान में 15 बच्चों का उपचार चल रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान मां का संतुलित आहार बेहद जरूरी है, जिससे बच्चों को कुपोषण से काफी हद तक बचाया जा सकता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी सेंटर पर भी बच्चों के लिए पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। जिससे बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सके। सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे अमरोहा शहर में और दूसरे स्थान पर धनौरा है। अतिकुपोषित बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या गंगेश्वरी ब्लाक में है।
ब्लाकवार बच्चों की संख्या
ब्लाक का नाम अतिकुपोषित कुपोषित
अमरोहा शहर 14 124
अमरोहा 15 75
धनौरा 13 91
गजरौला 11 43
गंगेश्वरी 16 83
हसनपुर 12 78
जोया 12 46
पिछले साल से कम हुई संख्या
अमरोहा। पिछले साल की अपेक्षा कुपोषित बच्चों की संख्या कम हुई है लेकिन पूरी तरह से इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। पिछले जहां कुपोषित बच्चों की संख्या 4633 थी वहीं इस साल 540 है। इस तरह ही अतिकुपोषित बच्चों की संख्या पिछले साल 947 थी लेकिन इस बार 93 है। सवाल यह भी उठता है कि एक साल में इतनी तेजी के साथ कुपोषण से परेशान बच्चों की संख्या में कमी आई है।
प्रोटीन की कमी से बच्चों में कुपोषण की समस्या आती है। अगर गर्भावस्था के दौरान ही महिला के खानपान पर विशेष ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक इस समस्या से राहत मिल सकती है।महिला को इस दौरान संतुलित आहार लेना चाहिए। जन्म के समय बच्चे का वजन ढाई किलो होना चाहिए। अगर बच्चे को बार-बार निमोनिया हो रहा है या फिर दस्त होते हैं तो बच्चे में कुपोषण की समस्या हो सकती है। इस समय एनआरसी में 15 बच्चों का उपचार चल रहा है। -डॉ. एके भंडारी, सीएमएस