अमरोहा। किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में न्यायालय ने दोषी को दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही 13 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को सौंपने के निर्देश दिए हैं। आरोपी जमानत पर बाहर था, कोर्ट का फैसला आने के बाद उसे कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।
यह घटना 4 दिसंबर 2017 की है। हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव किसान का परिवार रहता है। उसकी नाबालिग बेटी जनपद बुलंदशहर में सिलाई का काम सीखने गई थी। वहां रहने वाला मोनू किशोरी को परेशान करता था। लिहाजा किशोरी सिलाई का काम सीखना छोड़कर दो महीना के भीतर घर वापस लौट आई थी। बावजूद इसके मोनू उसे परेशान करता रहा। 14 दिसंबर की सुबह करीब 11 बजे किशोरी कूड़ा डालने गई थी। तभी मोनू किशोरी का अपहरण कर ले गया। किशोरी के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसके तलाश किया। लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। लिहाजा पिता ने आरोपी मोनू के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। दस दिन बाद पुलिस ने आरोपी मोनू को गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद कर लिया था। इस दौरान किशोरी ने मोनू पर दुष्कर्म करने आरोप लगाया था। लिहाजा पुलिस ने मुकदमे में दुष्कर्म की धाराओं की बढ़ोतरी कर मोनू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आ गया था।
यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (पॉक्सो एक्ट प्रथम) अवधेश कुमार सिंह की अदालत में विचाराधीन था। शुक्रवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट बसंत सिंह सैनी ने पैरवी की। न्यायालय ने साक्ष्य के आधार पर आरोपी मोनू को दोषी करार दिया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 13 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।