अमेठी सिटी। ओवरलोड वाहनों की एंट्री के नाम पर चल रहे अवैध वसूली के खेल में एआरटीओ कार्यालय अमेठी के कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आई है, जो अब एसटीएफ के साथ ही रायबरेली पुलिस के रडार पर हैं। रायबरेली के डीह थाने में दर्ज एफआईआर में प्रतापगढ़ व रायबरेली के अलावा अमेठी के सरकारी कर्मचारी भी आरोपी बनाए गए हैं।
डीह पुलिस जल्द ही पूछताछ के लिए यहां के कर्मचारियों को तलब कर सकती है। इसको लेकर एआरटीओ कार्यालय में गहमागहमी बढ़ गई है। यही नहीं अमेठी पुलिस भी इस प्रकरण की अंदरखाने जांच कराने में जुटी है।
डीह थाना प्रभारी जितेंद्र मोहन सरोज ने मंगलवार को 18 नामजद व पांच अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इसमें अमेठी कस्बे के शिवम शुक्ला का नाम भी शामिल है। पुलिस शिवम की तलाश में है।
इसके अलावा अमेठी एआरटीओ कार्यालय के तीन कर्मचारियों के नाम भी जांच में सामने आने की बात चर्चा में है। इनमें एक अधिकारी, दीवान और ड्राइवर का नाम भी शामिल है।
इसके अलावा यहां पूर्व में तैनात रहे तीन कर्मचारियों का डेटा भी खंगाला जा रहा है। फतेहपुर और बांदा से आने वाले मौरंग के ओवरलोड वाहनों को अमेठी से सुल्तानपुर या प्रतापगढ़ पास कराने के नाम पर प्रति वाहन 2500 से 3000 रुपये वसूली की जा रही थी।
पहले एसटीएफ और फिर रायबरेली पुलिस के सक्रिय होने पर अवैध वसूली करने वालों में खलबली मची है। अमेठी के जगदीशपुर के रहने वाले एक दलाल का नाम भी पिछले 10 दिनों से काफी चर्चा में है। वह भी डॉक्टर के नाम से ओवरलोड वाहनों की एंट्री कराता था, ऐसी चर्चा है।
एआरटीओ महेंद्र बाबू ने बताया कि वह लगातार व्यवस्थाओं को सुधारने में लगे हैं। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के लिए प्रतिदिन अभियान चला रहे हैं। अवैध वसूली करने वालों के बारे में पता चलता है तो खुद एफआईआर दर्ज कराएंगे। (संवाद)