गौरीगंज (अमेठी)। तहसील क्षेत्र मुसाफिरखाना की दो जर्जर सड़कों की जांच करने पहुंची एसआईटी की विशेष टीम बुधवार को भी इससे जुड़े तथ्य खंगालने में जुटी रही। टीम ने सड़क की जर्जर स्थिति देखने के बाद दोबारा कलेक्ट्रेट सभागार में जिम्मेदार अफसरों के साथ बैठक की। इसमें अफसरों से मांगे गये तथ्य एकत्र करने के अलावा मिले तथ्यों के आधार पर सवाल किए गये। टीम ने मीडिया से भी मिलकर सड़कों के खराब होने से जुड़े तथ्यों की तह में जाने की कोशिश की।
विधानसभा क्षेत्र गौरीगंज में आने वाले कादूनाला थौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) की बदहाली की जांच बुधवार को भी चलती रही। गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह की शिकायत व शासन के निर्देश पर मंगलवार को एसपी एसआईटी देवरंजन वर्मा के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुंची विशेष टीम ने बुधवार को भी मामले की छानबीन की।
पूरी टीम सबसे पहले (एसपी के अलावा इंस्पेक्टर मनोज तिवारी व विनोद कुमार त्रिपाठी) 9.15 किलोमीटर लंबे कादूनाला थौरी मार्ग का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंची। टीम ने यह जानने व समझने की कोशिश की कि यह सड़क आखिर कब से खराब है। टीम के सदस्यों ने सड़क किनारे मिले लोगों से भी इस संबंध में बात की। लोगों से पूछा कि यह सड़क बनने के कितने दिन बाद खराब हुई थी।
टीम ने सड़क से निकलने वाले संपर्क मार्गों की स्थिति भी देखी। इस मार्ग पर दोनों तरफ बिल्डिंग मटेरियल की कितनी दुकानें हैं और उन दुकानों पर कितना माल डंप है, इसके जरिए सड़क पर ट्रकों की आवाजाही को जानने की कोशिश भी की। वापस लौटने के बाद टीम ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिम्मेदार अफसरों के साथ बैठक की।
टीम ने बैठक में शामिल पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई, यूपीडा व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था के अफसरों से मंगलवार की बैठक में मांगेे गये सड़क निर्माण से जुड़े अभिलेख लेने के अलावा कई तीखे सवाल किए। एसआईटी के सवालों से कई बार अफसर असहज नजर आए।
कादूनाला से थौरी व मुसाफिरखाना से पारा बाजार को जोड़ने वाली दोनों सड़कों के खराब होने की जिम्मेदारी अफसर एक-दूसरे पर डालते रहे। सड़क का निर्माण करने वाली संस्था पीएमजीएसवाई का साफ कहना था कि उन्होंने सड़कों का निर्माण मानक के अनुरूप किया था। दोनों सड़कें पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण होने के दौरान ओवरलोडेड डंपर व अन्य वाहनों की आवाजाही से चलने लायक नहीं रह गईं।
उधर यूपीडा व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली एपको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अफसर यह साबित करने में लगे रहे कि दोनों सड़कें एक्सप्रेसवे का निर्माण होने के पहले टूट चुकी थीं। गौरतलब है कि दोनों सड़कों का निर्माण वर्ष 2016 के अंत में पूरा हुआ था और 2018 से ही इनकी बदहाली चर्चा में है।
पीएमजीएसवाई के तहत निर्मित 3.75 मीटर चौड़े कादूनाला-थौरी मार्ग के निर्माण पर तीन करोड़ 80 लाख 67 हजार रुपये की लागत आई थी। इस सड़क का निर्माण यूनिक कांस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था। इसी तरह 5.50 मीटर चौड़े मुसाफिरखाना-पारा संपर्क मार्ग का निर्माण चार करोड़ 28 लाख 99 हजार रुपये की लागत से हुआ था। इस सड़क की कार्यदायी संस्था मेसर्स राज कांस्ट्रक्शन कंपनी ने कराया था।