गौरीगंज (अमेठी)। जनवरी माह में लगातार परिवर्तित हो रहे मौसम के बीच निमोनिया ने पांव पसार दिया है। ठंड में बच्चों और बुजुर्गों को संक्रमण के बीच स्वस्थ रखना परिवार के लिए चुनौती बना हुआ है। जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी में इन दिनों निमोनिया पीड़ितों की संख्या में इजाफा हो गया है। आंकड़ों के अनुसार जिला अस्पताल के साथ सभी सीएचसी-पीएचसी में इस समय प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज निमोनिया के मिल रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से पड़ रही ठंड और शीतलहर से जहां बुजुर्ग परेशान हैं, वहीं बच्चों के लिए भी यह मौसम किसी चुनौती से कम नहीं है। असैदापुर स्थित मलिक मोहम्मद संयुक्त जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज औसतन 50-60 तो जिले की सभी 13 सीएचसी व 30-30 व पीएचसी में 10 से लेकर 20 तक मरीज सर्दी-जुकाम व निमोनिया की समस्या से पहुंच रहे हैं। बीमारी की चपेट में आने वालों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। ठंड को देखते हुए बच्चों में सर्दी, खांसी, निमोनिया के साथ ही कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ा है। अस्पताल में सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों के साथ ही निमोनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
अस्पताल के फिजीशियन डॉ. शुभम शुक्ल ने बताया कि बदलते मौसम में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में रोजाना इस तरह की बीमारियों से ग्रस्त मरीज आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लईकुज्जमा ने कहा कि ठंड के कारण बच्चों में ज्यादातर मौसमी बीमारी हो रही है। सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ गई है।
डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में मौसम बदलाव के कारण मरीज आ रहे हैं। इनके इलाज की समुचित व्यवस्था है। मरीजों को उचित दवा के साथ बचाव विधि समझाते हुए उनका इलाज किया जा रहा है। बच्चों को ठंड से बचाव के लिए छह माह तक के बच्चों को केवल मां का दूध पिलाएं। बड़े बच्चे एवं सभी को हल्का गुनगुना पानी पीने की जरूरत है। ऊनी कपड़े पहनें, परेशानी बढ़ने पर तत्काल में डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी है।
बीपी व हृदय के रोगी भी रहें सतर्क
बदलता मौसम दमा, ब्लड प्रेशर, हृदय रोगियों के लिए भी खतरनाक है। जिले में कोरोना के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत है। सर्दी का मौसम हाई ब्लड प्रेशर की समस्या वाले मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे में सर्दी से बचाव के साथ दवा नियमित रूप से लें। हृदय रोगी भी ठंड से बचाव के साथ चल रही दवाएं नियमित रूप से लेते रहें।
ठंड में बरतें विशेष सावधानी
चिकित्सक डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि लोग सर्दी-जुकाम होते ही सतर्क हो जाएं। बच्चों को संतुलित आहार दें। प्राथमिक उपचार में देरी न करें। बच्चे को बचे हुए टीके अवश्य लगवाएं। कुपोषित बच्चों का विशेष ध्यान रखें। किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सक से उपचार कराएं।
निमोनिया के यह हैं लक्षण
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि किसी भी संक्रमण के कारण फेफड़े में होने वाली सूजन को निमोनिया कहते हैं। हालांकि ज्यादातर निमोनिया बैक्टीरिया की वजह से होता है। इंफ्लुएंजा या कोविड-19 जैसे वायरस भी फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। लापरवाही बरतने पर निमोनिया, वयस्कों और बच्चों के लिए घातक साबित होती है।