अमेठी सिटी। तनाव भरी जीवनशैली ने लोगों की मानसिक सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। डिप्रेशन (अवसाद) और एंग्जायटी (चिंता, घबराहट) जैसी समस्याओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय गौरीगंज की मनोरोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 100 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 30 फीसदी एंग्जायटी और 35 फीसदी डिप्रेशन के रोगी हैं।
मानसिक रोग विभाग के चिकित्सक बीबी सिंह ने बताया कि लोग अक्सर डिप्रेशन और एंग्जायटी को समान मान लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। एंग्जायटी में मरीज को भविष्य को लेकर डर और असुरक्षा महसूस होती है। इसके लक्षणों में दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, सांस फूलना और तनाव शामिल हैं। यह समस्या अक्सर परीक्षा, इंटरव्यू या अनिश्चित परिस्थितियों में उभरती है।
वहीं डिप्रेशन में मरीज लगातार उदासी, निराशा और जीवन के प्रति अरुचि महसूस करता है। नींद की समस्या, भूख में कमी या ज्यादा होना, थकान और आत्मग्लानि इसके प्रमुख संकेत हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर परामर्श और दवा दोनों की आवश्यकता होती है। समय पर इलाज न होने पर ये बीमारी घातक हो सकती है।
डिप्रेशन और एंग्जायटी से बचाव के उपाय
- प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करें।
-संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें।
-देर रात तक जागने की आदत छोड़ें।
-मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित प्रयोग करें।
- परिवार और मित्रों से बातचीत करते रहें।
-समस्या गंभीर लगे तो विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
बुखार के 651 मरीजों ने कराया इलाज
जिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार को 1250 नए मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें 651 लोग बुखार से पीड़ित थे। परचा काउंटर, पैथोलॉजी और ओपीडी में लंबी कतारें लगी रहीं। फिजिशियन डॉ. शुभम पांडेय और डॉ. अमित यादव के कक्ष के बाहर सबसे अधिक भीड़ रही। मरीजों ने बताया कि पचरा बनवाने में आधे घंटे से अधिक लगा और डॉक्टर को दिखाने के लिए एक घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। जांच के लिए दिए गए सैंपल की रिपोर्ट दोपहर बाद दी गई।