इन्हौना (अमेठी)। सीएचसी सिंहपुर परिसर में ही जीवन रक्षक दवाएं जला दी गईं। दवाओं के जलाए जाने का वीडियो वायरल होने पर हड़कंप मच गया। अधीक्षक इसे अपनी तैनाती से पूर्व एक्स्पायर दवाएं जलाए जाने की बात कह रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दवा जलाने का प्रकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
गरीबों के इलाज के लिए शासन की ओर से प्रति वर्ष कई लाख की दवाएं सरकारी अस्पतालों पर आती हैं। आए दिन सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों पर बाहर से दवा लिखने के आरोप लगते रहते हैं। इस बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंहपुर परिसर में गरीबों को निशुल्क दी जाने वाली जीवन रक्षक दवाओं को जलाकर राख के ढेर में तब्दील कर दिया गया।
जलकर ढेर में तब्दील दवाओं का वीडियो शुक्रवार देर शाम से वायरल होने लाग। वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अस्पताल में जीवन रक्षक यह दवाएं क्यों जलाई गईं। क्या कमीशन के फेर में मरीजों को अस्पताल से देने के बजाए बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं जो इतनी मात्रा में दवाएं बच गईं।
या अगर यह दवाएं एक्सपायर थीं तो भी उन्हें परिसर के भीतर कैसे जला दिया गया। जबकि प्रोटोकॉल के मुताबिक कोई भी दवा खराब या एक्सपायर हो जाने के बाद दवा कंपनी को इस संबंध में सूचित किया जाता है। दवाएं जलाई नहीं जातीं बल्कि उन्हें आबादी से दूर जमीन में दबा देने का प्रावधान है। क्योंकि इन्हें जलने से खतरनाक रासायनिक तत्व लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय लोगों ने डीएम से प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
चार माह पहले का मामला
अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार दवाओं को जलाने का मामला करीब चार माह पुराना है। कहते हैं कि जो दवाएं जलाई गई थीं उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। कहा कि उनकी तैनात अभी हाल ही में सीएचसी अधीक्षक के पद पर हुई है।
एसीएमओ करेंगे प्रकरण की जांच
सीएचसी सिंहपुर परिसर में जीवन रक्षक दवाओं को जलाने का वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ डॉ. आशुतोष दुबे ने जांच टीम गठित की है। कहा कि एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद की अध्यक्षता में जांच टीम नामित की गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
04 : इन्हौना : सीएचसी सिंहपुर परिसर में जली पड़ीं दवाएं। -संवाद- फोटो : AMETHI