गौरीगंज (अमेठी)। दो सड़कों के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर अनशन कर रहे सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह को क्षेत्र के लोगों का भी समर्थन मिलने लगा है। सोमवार को बड़ी संख्या में लोग लखनऊ स्थित जीपीओ पहुंचे और अनशन में शामिल हुए। लोगों ने विधायक के मुखौटा पहन कर उनके समर्थन का एलान किया। गौरतलब होगा कि शासन द्वारा जबरन अस्पताल में भर्ती कराने के बावजूद विधायक राकेश प्रताप अस्पताल में तो डीडीसी धर्मेंद्र धोबी जीपीओ पर पांच दिनों से अनशन पर हैं।
मुसाफिरखाना क्षेत्र की दो जर्जर सड़कों (कादूनाला-थौरी और मुसाफिरखाना-पारा मार्ग) को ठीक कराने की मांग शासन द्वारा पूरी न किए जाने पर गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने 31 अक्तूबर को विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र (अभी स्वीकार नहीं गया) दे दिया था। पद छोड़ने के बाद विधायक व उनके समर्थकों नेे जीपीओ पर धरना शुरू कर दिया।
धरने के चार दिन बाद (दीपावली के दिन) चार अक्तूबर को विधायक व उनके समर्थक डीडीसी धर्मेंद्र धोबी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। अनशन के दूसरे दिन पांच अक्तूबर की रात प्रशासन ने राकेश प्रताप को जबरन सिविल अस्पताल में भर्ती करवा दिया। विधायक के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने उनके दोनों हाथ बेड पर बांधकर ड्रिप भी चढ़ा दी।
बावजूद इसके विधायक अस्पताल में तो उनके अन्य समर्थकों के साथ धर्मेंद्र जीपीओ पर अनशन कर रहे हैं। धरने में शामिल होने के लिए गौरीगंज से बड़ी संख्या में लोग लखनऊ पहुंचे। लखनऊ पहुंचे लोगों ने न सिर्फ अस्पताल पहुंचकर विधायक का हाल जाना बल्कि दिन भर धरना भी दिया। विधायक के धरने में पहुंचे लोगों ने उनकी मांग का समर्थन करते हुए दमनकारी नीति अपनाने के लिए शासन-प्रशासन की निंदा की।
सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड
विधायक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनके समर्थकों ने नया ट्रेंड निकाला है। रविवार के बाद सोमवार को भी धरना स्थल पर मौजूद लोगों में से अधिकांश ने राकेश के चेहरे का मुखौटा लगाकर धरना दिया। फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मैं भी राकेश प्रताप सिंह का ट्रेंड चल रहा है। विधायक समर्थक उनके पक्ष में तो दूसरे दलों के लोग उनके विरोध में लंबी चौड़ी पोस्ट डाल रहे हैं।
नहीं तोड़ूंगा अनशन
विधायक ने कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों को नहीं मान रही है। स्वास्थ्य ठीक होने के बावजूद उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराकर हाथ बांधकर ड्रिप चढ़ा दी गई। राकेश ने कहा कि सरकार के दमनकारी रवैये से वे घबराने वाले नहीं हैं। जब तक दोनों सड़कों का पुनर्निर्माण शुरू नहीं होगा वे अनशन और उनके समर्थक धरना जारी रखेंगे।