अमेठी। गुगवाछ के गांव राजापुर में हुई घटना के पीछे ग्रामीण ग्राम प्रधान का हाथ बता रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप था कि यह घटना ग्राम प्रधान के उकसाने पर हुई। जिस समय संकठा पक्ष के लोगों को घेर कर लाठी डंडे व बांके से मारा पीटा गया, उस समय ग्राम प्रधान व उनके पति मौके पर मौजूद थे। उनका पुत्र नितिन हमलारों में शामिल था।
गुगवाछ के तिवारीपुर गांव की रहने वाली आशा तिवारी (पीआरडी) कुछ माह पूर्व हुए पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान बनने के बाद से ही आशा का दखल गांव में बढ़ गया। पूरे गांव में कोई भी कहीं भी एक ईंट रखता तो आशा व उनका पुत्र मौके पर पहुंच जाते। दोनों लोगों को काम बंद करने के लिए कहते। नहीं मानने पर आशा हलका पुलिस के माध्यम से काम बंद करवा देतीं।
ग्रामीणों का तो यहां तक आरोप था कि चुनाव संपन्न होने के महज नौ माह के अंदर आशा ने गांव की कई सरकारी जमीन को लोगों के हाथ अघोषित तरीके से बेच दिया। राजापुर गांव में आबादी की भूमि पर राम दुलारे द्वारा किया जा रहा कब्जा भी ग्राम प्रधान की शह पर था। ग्रामीणों ने कहा कि जब भी संकठा की शिकायत पर पुलिस रोकने पहुंचती थी, उसके बाद मौके पर पहुंचकर आशा निर्माण शुरू करा देती थी। कहती थी कि तुम बनाओ बाकी मैं देख लूंगी।
नौ माह पूर्व ग्राम प्रधान बनने वाली आशा पीआरडी में है। ग्राम प्रधान बनने से पहले वह अमेठी थाने से लेकर जिला मुख्यालय तक पर जहां भी ड्यूटी लगती थी, करती थी। ग्राम प्रधान निर्वाचित होने के बाद से उसके हाव भाव बदल गए। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ माह पूर्व उसने अमेठी तहसील परिसर में एक लेखपाल को सरेआम पीट दिया था।
पीड़ित परिवार की गायत्री ने बताया कि मंगलवार की रात जब उनके परिवार के चार लोगों को पीट-पीट कर मार डाला गया, तब आशा व उनका पति मौके पर मौजूद थे। उसका पुत्र हमला करने वालों में शामिल था। गायत्री ने बताया कि इस भूमि पर कब्जा कराने के लिए आशा ने राम दुलारे से दो लाख रुपये लिया था।