अमेठी सिटी। ईश्वर अपने भक्तों के भाव व भक्ति के भूखे हैं। अहंकार भगवान का आहार है। अहंकारी के जीवन में भगवान कभी नहीं आते हैं। ये बातें ब्लॉक अमेठी के बहोरापुर गांव में आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन प्रवाचक श्रीमहराज ने भगवान के बाल चरित्र, ताड़का वध की कथा का वर्णन करते हुए कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि कथा श्रवण मात्र से जीवन के संकट स्वत: ही दूर हो जाते हैं। भगवान राम का चरित्र हमें प्रेरणा देता है कि जीवन में आईं परेशानियों का सामना करना कैसे करना है। अगर जीवन में कष्ट को दूर करना है तो राम नाम जप की निरंतर साधना करें। प्रवाचक ने राम-सीता मिलन प्रसंग में बताया कि यज्ञ की रक्षा के लिए विश्वामित्र महाराज दशरथ से राम व लक्ष्मण को लेकर गए। वहां पर आसुरी शक्तियों का वध कर ऋषि व मुनियों को अभय प्रदान किया।
बताया कि राजा जनक ने देवी सीता का स्वयंवर रखा था। वनगमन करते समय ऋषि विश्वामित्र को राजा जनक की भेजी हुई कुमकुम पत्रिका मिलती है और विश्वामित्र राम-लक्ष्मण के साथ जनकपुरी में राजकुमारी सीता के स्वयंवर में पहुंचते हैं। राम व सीता की प्रथम भेंट पुष्प वाटिका में होती है, जहां सीता अपनी सखियों सहित गौरी पूजन के लिए पुष्प तोडती हैं। जैसे ही माता सीता श्रीराम को देखती हैं तो अपनी दोनों आंखें बंद कर लेती हैं। इस दौरान रामकृपाल सिंह, डाॅ. अभिनव प्रताप सिंह, अजीत सिंह, दिनेश सिंह, जगदीश सिंह, अमर नाथ सिंह, कृष्ण भगवान यादव आदि मौजूद रहे।