08 : गौरीगंज : शहर के बलीपुर के पास हल-बैल से धान रोपाई के लिए खेत तैयार करता किसान।
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गौरीगंज (अमेठी)। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग ने किसानों को खेती करने के पुराने तरीके अपनाने पर मजबूर कर दिया है। धान रोपाई के लिए ट्रैक्टर के बजाए किसान हल-बैल के जरिए खेत तैयार कर रहे हैं।
पेट्रोलियम पदार्थों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती कीमतों ने आम नागरिकों के साथ किसानों को परेशानी में डाल दिया है। लगातार बढ़ रही कीमतों से परेशान लोग जहां इन दिनों बाइक व कार का कम प्रयोग कर रहे हैं वहीं किसान भी खेती करने के पुराने तरीके की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
धान रोपाई के समय बरसात नहीं होने से जहां किसान खेतों में पानी भरने पर आने वाले भार को झेलने पर विवश हैं वहीं महंगे दामों पर ट्रैक्टर से जुताई करानी पड़ रही है। हालांकि कुछ किसानों ने अब ट्रैक्टर के बजाए हल-बैल से खेत तैयार करने की कोशिश शुरू की है।
शहर के बलीपुर निवासी पवन कुमार हल-बैल से धान का खेत तैयार करते दिखे। किसान पवन कुमार ने बताया कि ट्रैक्टर से खेत तैयार करने में लंबी लागत आती है। इसकी अपेक्षा हल-बैल से खेत तैयार करना आसान व सस्ता है। कहा कि इससे पशुपालन की बंद हुई प्रथा भी शुरू होगी।
पशु पालने से खेती-किसानी के साथ ही दुग्ध उत्पादन कर अपनी आय बढ़ाई जा सकेगी तो डीजल के बढ़ते दामों की कीमतों से किसान पूरी तरह से प्रभावित नहीं होंगे। गौरतलब होगा कि पवन कुमार की ही तरह जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के बड़ी संख्या में किसान खेती के प्राचीन तरीके को अपना रहे हैं।