तिलाई। चिकित्सा महाविद्यालय और संयुक्त जिला अस्पताल गौरीगंज में मरीजों को बाहरी दवाएं लिखी जा रही हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और अनावश्यक दौड़भाग में उनकी सेहत भी प्रभावित हो रही है। रोक के बावजूद कमीशन खोरी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है, जिससे निशुल्क सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा।
बृहस्पतिवार को चिकित्सा महाविद्यालय के बाह्य रोगी विभाग में कई मरीजों ने अपनी समस्या बताई। सिंहपुर की केशपति ने कहा कि चिकित्सक ने आधी दवाएं बाहर की लिखी हैं। राजामऊ के रामप्रीत को सांस संबंधी समस्या है और उन्हें हर बार महंगी बाहरी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
बाराबंकी की लीलावती भी सीने के दर्द के लिए कई बार बाहर की दवाएं लिखवा चुकी हैं। चिकित्सा महाविद्यालय प्राचार्य योगेश यादव ने बाहर की दवाओं पर पूर्ण रोक की बात कही। उन्होंने मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए जाने की जानकारी दी। गौरीगंज स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में भी सरकारी परचे पर बाहरी दवाएं लिखी जा रही हैं। वाह्य रोगी विभाग में बाहरी लोग डॉक्टरों के कक्ष में बैठे मिले।
मरीजों की आपबीती
भटगवां की सुरसती ने बताया कि आर्थिक समस्या के कारण सरकारी अस्पताल में इलाज करा रही हैं। चिकित्सक ने आठ दवाओं में से चार बाहर से खरीदने को कहा। नसीराबाद निवासी मुन्नू और उनकी पत्नी गीता देवी की बेटी निधि का इलाज चल रहा है। चिकित्सक ने छह दवाओं में से दो महंगी दवाएं बाहर से लिखी हैं। त्वचा रोग विभाग से लौटे उमेश कुमार को भी एक दवा बाहर से लेनी पड़ी।
अधिकारियों का आश्वासन
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बद्री प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि बाहर से दवा लिखने वाले चिकित्सकों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। यह अभियान मरीजों को हो रही परेशानी को दूर करने के लिए चलाया जा रहा है।