जगदीशपुर (संवाद)। पूरे जिले में करीब 36 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश बंद होने के बाद भी लोगों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को चौथे दिन भी कई निचली बस्तियों में पानी भरा है। नालों के उफान पर पहुंचने व कई सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित है। लोग बची हुई गृहस्थी को पानी से बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
जगदीशपुर-शुकुल बाजार मार्ग से निकलने वाले सत्थिन रोड पर भिखनापुर से लखनीपुर तक नाले के बाढ़ का पानी भरा होने से सड़क पर आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। आवागमन प्रभावित होने से अयोध्या और अमेठी जाने वालों की परेशानी बढ़ गई है।
नाले के किनारे स्थित गांव पूरे मोती शुक्ल में शुक्रवार रात अचानक नाले का पानी भर जाने से रातों रात लोगों को घरों से बाहर निकलना पड़ा। ग्रामीण रमाशंकर, शैलेंद्र तिवारी, राम मिलन व बंसीलाल ने बताया की रात करीब 12 से एक बजे के बीच नाले का जल स्तर इस कदर बढ़ा कि पानी घरों में घुसने लगा। आनन-फानन में जो संभव हो सका किया।
गृहस्थी का कुछ सामान छत पर तो कुछ बाहर पहुंचाया गया। नीलम तिवारी ने बताया की उनके दरवाजे की चौखट तक नाले का पानी भरा होने से घर के बाहर लगे नल से पीने का पानी लाना मुश्किल हो गया है। बारिश में गांव के राम कुबेर, राम भवन, बैजनाथ, अनंत राम तिवारी के कच्चे मकान ढह गए हैं। यही नाला आगे चलकर डोमाडीह गांव में भी तबाही मचा रहा है।
गांव निवासी कृपा शंकर, दयाशंकर, भारत लाल के घरों में पानी भर गया है। इन लोगों ने कुछ सामान बाहर निकाला लेकिन काफी सामान पानी में डूब गया। कई घरों के पास तो बहाव इस कदर था कि हल्के सामान बहने लगे।
जगदीशपुर से अयोध्या तक बन रही फोर लेन सड़क के सर्विस लेन की ऊंचाई कम होने से पूरी सड़क का आवागमन बंद है। इस मार्ग से जुड़ा डोमाडीह व पूरे नरसिंह मार्ग भी बंद है। ऐसे में बारिस बंद होने के बाद भी लोगों की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। अब तक ऐसे किसी भी गांव में प्रशासनिक अफसर व कर्मचारी नहीं पहुंचे हैं।
प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में रोष
अतिवृष्टि के बाद जिला व तहसील प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की राहत नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में रोष है। बताते चलें कि बारिश बंद होने के करीब दो दिन बाद भी जिले के कई गांवों में शनिवार को भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्व कर्मी गांव जाने के बजाए मकानों व अन्य क्षति की सूचना गांव के प्रधान आदि से संकलित कर रहे हैं।