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राजपथ पर कदमताल करेंगी अमेठी की कैडेट शालू

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11 : अमेठी : यूपी बटालियन एनसीसी की कैडेट शालू मिश्रा। -संवाद - फोटो : AMETHI
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अमेठी। देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड में करीब 36 साल बाद शहर स्थित आरआरपीजी कॉलेज के एनसीसी की छात्रा को यूपी के दल में शामिल होकर राजपथ पर कदमताल करने का मौका मिला है। छात्रा इन दिनों दिल्ली के कैंप में गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड की तैयारी में जुटी है।
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शहर स्थित आरआरपीजी कॉलेज के बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा शालू मिश्रा 18 यूपी बटालियन एनसीसी की कैडेट हैं। शालू का चयन दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाली परेड में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व के लिए हुआ है। कैडेट शालू मिश्रा एक अधिकारी के रूप में भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।
शालू मिश्रा ने बताया मेरी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय लेफ्टिनेंट डॉ. उमेश सिंह को जाता है। वह प्रवेश के साथ ही उन्हें हमेशा राजपथ की परेड के साथ ही भारतीय सेना में अधिकारी पद पर चयनित होने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।
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कैडेट शालू ने अपनी इस उपलब्धि का प्रेरणा श्रोत डॉ. संजय सिंह, डॉ. अमिता सिंह, कमांडिंग ऑफिसर कर्नल एल श्रीनिवासन एवं महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. ओपी त्रिपाठी को बताया। गौरतलब है कि 1986 के बाद एक बार फिर आरआरपीजी कॉलेज की एनसीसी कैडेट शालू मिश्रा ने कॉलेज और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। शालू की इस उपलब्धि पर परिवारीजनों के साथ महाविद्यालय परिवार अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
मुश्किल होता है चयन
कॉलेज के एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. उमेश सिंह ने कहा कि आरडीसी परेड में चयन की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है। इसके लिए कैडेट को तीन माह के कठिन परिश्रम के बाद यह मुकाम हासिल होता है। इसकी शुरुआत महाविद्यालय स्तर पर, बटालियन स्तर पर तथा उसके बाद मुख्यालय द्वारा चयनित छात्रों को आईजीसी कैंप में भेजा जाता है। जहां से उत्तर प्रदेश डायरेक्ट्रेट की टीम चुनाव कर नई दिल्ली में डीजी एनसीसी मुख्यालय द्वारा राजपथ के लिए कैडेटों का चयन होता है। इसमें प्रदेश के गिने-चुने कैडेट ही इस मुकाम हासिल कर पाते हैं।
हो रहा गर्व
कैडेट शालू मिश्रा ने दूरभाष पर बताया की राजपथ पर परेड के लिए चयनित होने पर उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है। कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। उसी एक कड़ी के रूप में मैं भी ऑफिसर के रूप में सेना में अपना योगदान देना चाहती हूं। कहा बेटियों को खुद को कम नहीं आंकना चाहिए। वह आगे निकल कर आएं और कॉलेज व क्षेत्र का नाम देश-विदेश में रोशन करें।
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