गौरीगंज (अमेठी)। माध्यमिक स्कूलों को अवस्थापना सुविधा से लैस कर निजी स्कूलों की तर्ज पर संचालित करने की कोशिश जिले में फ्लॉप साबित हो रही है। जिले में संचालित 32 राजकीय स्कूलों में सृजित 531 पद के सापेक्ष वर्तमान शैक्षिक सत्र में मात्र 173 शिक्षकों की ही तैनाती है।
8,136 बच्चों का भविष्य बिना विषय विशेषज्ञ संवारा जा रहा है। शिक्षकों की कमी से माध्यमिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है। बिना विषय विशेषज्ञ के बच्चे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा कैसे उत्तीर्ण होंगेे, इसका जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले में 35 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज व राजकीय हाईस्कूल संचालित हैं। इन कॉलेजों में शैक्षिक व्यवस्था फ्लॉप साबित हो रही है। स्कूलों में सृजित प्रधानाचार्या, प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व सहायक अध्यापक पद के सापेक्ष नियुक्ति नहीं है।
कई स्कूलों में जहां एक या दो शिक्षकों की तैनाती है, वहीं कई में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है। कोविड संक्रमण कॉल के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग स्कूलों को अवस्थापना सुविधा से लैस कर निजी स्कूलों की तर्ज पर संचालित करने की कोशिश भले ही कर रहा हो लेकिन जिले में स्कूलों की हकीकत अलग है।
अलग-अलग 32 राजकीय स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक 8,136 बच्चे शैक्षिक सत्र 2021-22 में नामांकित हैं। सर्वाधिक परेशानी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। बिना विषय विशेषज्ञ बच्चे हिंदी, गणित, जीवविज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, इतिहास, भूगोल, कला, गृहविज्ञान व नागरिक शास्त्र समेत अन्य विषयों की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षकों की कमी से एक तरफ जहां राजकीय स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठ रहा है, वहीं बच्चों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इससे जुड़े सवाल पर जिम्मेदार मौन हैं। राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी से ज्यादातर बच्चे निजी स्कूलों या कोचिंग का सहारा लेने को मजबूर हैं। सरकार का हर बच्चे को सस्ती, सुलभ व बेहतर शिक्षा देने का दावा जिले में फ्लॉप साबित हो रहा है।
डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ सहायक राकेश कश्यप ने बताया कि जिले में जीजीआईसी गौरीगंज, जगदीशपुर, जामो, जायस, ढेमा, मुसाफिरखाना, शाहगढ़, शुकुल बाजार, सोनारी कला, अमेठी व संग्रामपुर, जीआईसी जामो, इन्हौना, जायस, टीकरमाफी, फुरसतगंज व राजा फत्तेपुर तथा राजकीय हाईस्कूल अफुइया, कंजास, अमेठी, चेतरा बुजुर्ग, तेंदुआ, पीढ़ी, मंगरा, मंगरौली, रानीगंज, सरमे, सवितापुर, सातन का पुरवा, सिंहपुर, सेमरौता व हरिहरपुर संचालित हो रहे हैं। इन कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 में 8,136 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में नामांकित हैं।
जिले में संचालित 17 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के सृजित 17 पदों में से मात्र चार पर तैनाती है। 13 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद रिक्त हैं। 15 राजकीय हाईस्कूलों में प्रधानाचार्य के सृजित 15 पदों में से मात्र 10 पर ही तैनाती है। प्रवक्ता के सृजित 182 पदों के सापेक्ष 21 पद पर ही तैनाती है। 161 पद रिक्त हैं। सहायक अध्यापक के सृजित 314 पदों के सापेक्ष मात्र 138 पर ही तैनाती है।
राजकीय स्कूलों में सिर्फ शिक्षकों की ही कमी नहीं है बल्कि शिक्षणेतर कर्मियों की कमी से भी स्कूल के कार्यों में परेशानी हो रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार 32 राजकीय स्कूलों में सृजित लिपिक के 56 पदों में से 25 पदों पर तैनाती है जबकि 31 पद रिक्त हैं। इसी तरह चतुर्थ श्रेणी के सृजित 176 पदों में से 45 पर ही तैनाती हैं।
डीआईओएस जय करन लाल वर्मा ने बताया कि जिले में रिक्त पदों की सूचना शासन को भेजते हुए शिक्षकों की तैनाती का अनुरोध किया गया है। शासन स्तर पर प्रवक्ता चयन प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रवक्ता मिलने की उम्मीद है। शैक्षिक व्यवस्था दुरुस्त हो, इसके लिए स्कूलों को अभिभावक-शिक्षक समिति के माध्यम से प्राइवेट शिक्षकों की तैनाती करने का निर्देश दिया गया है।