कटेहरी (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के घाघूपुर में श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को प्रवाचक बालमुकुंद शास्त्री ने कपिल चरित्र, भगवान के चौबीस अवतार, समुद्र मंथन, भक्त प्रह्लाद और नरसिंह अवतार के चरित्रों का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का हृदय ही संसार रूपी समुद्र है और हमारे अच्छे-बुरे विचार ही मंथन हैं। भक्ति और सद्कर्म अमृत है, वहीं बुरे संस्कार और अहंकार हलाहल विष की तरह मनुष्य को नष्ट कर देते हैं। हिरण्यकश्यप अहंकार में डूबा हुआ था। प्रभु ने अपने भक्त की रक्षा की। इसके बाद नरसिंह अवतार में भगवान ने पापियों का अंत कर धर्म की स्थापना की। प्रवाचक ने कहा कि भागवत सिर्फ कथा नहीं, जीवन जीने की कला है। भागवत भक्ति से जीवन का सच्चा लक्ष्य मिलता है। इस दौरान शिव शंकर मिश्रा, गौरी शंकर मिश्रा, राम बुझारत मिश्रा, शत्रुघ्न तिवारी, राम भुवाल मिश्रा, पिंटू यादव, रंजीत राजभर, प्रधान राकेश मिश्रा उपस्थित रहे।