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एसडीएम का घेराव कर लेखपालों ने किया हंगामा

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अंबेडकरनगर के आलापुर में एसडीएम का घेराव कर हंगामा करते लेखपाल। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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आलापुर (अंबेडकरनगर)। साथी कर्मचारी को नोटिस दिए जाने से खफा लेखपालों ने मंगलवार को आलापुर तहसील में एसडीएम का घेराव करते हुए जमकर हंगामा किया। लेखपालों ने आरोप लगाया कि एसडीएम का व्यवहार लगातार अपमानजनक बना हुआ है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। आक्रोशित लेखपाल एसडीएम की गाड़ी के आगे खड़े हो गए और उनका गेट खोल दिया। इसके बाद नारेबाजी करने लगे।
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इस पर एसडीएम को वाहन से उतरकर अपने कक्ष में वापस जाना पड़ा। वहां भी लेखपालों ने खूब नारेबाजी व हंगामा किया। बाद में अधिवक्ताओं के हस्तक्षेप पर लेखपालों का आक्रोश शांत हुआ। इसकी जानकारी मिलते ही सीओ आलापुर समेत कई थानों की फोर्स तहसील पहुंच गई। उधर, डीएम के संज्ञान में मामला लाने के बाद एसडीएम ने जहांगीरगंज थाने में तीन लेखपालों के विरुद्ध नामजद तथा 25 अज्ञात लेखपालों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज करा दिया। इसमें एसडीएम ने लेखपालों पर आरोप लगाया कि उन्होंने जूता निकाल कर पिटाई करने तथा दलित एक्ट में फंसा देने की धमकी दी। इस मामले मेें तीन लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है।
तहसील परिसर में सोमवार को बीएलओ की बैठक हुई थी। इसमें अधिकारियों की ओर से कई तरह की जानकारियां मांगी जा रही थीं। एसडीएम मोहनलाल गुप्त ने एक लेखपाल की लापरवाही पर नाराजगी जताई। इस पर लेखपाल व एसडीएम में कहासुनी हो गई। इसे देखते हुए सोमवार देर शाम संबंधित लेखपाल अनुज प्रताप शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। इसी को लेकर लेखपालों का आक्रोश भड़क गया।
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तहसील क्षेत्र के सभी लेखपाल मंगलवार को तहसील परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने एसडीएम पर अक्सर अभद्र भाषा का प्रयोग करने तथा लेखपालों को अपमानित करने का आरोप लगाते हुए तय किया कि इस रवैये को लेकर एसडीएम से सीधी बात की जाएगी। उन्हें अपने रवैये में बदलाव लाना होगा। लेखपालों की बैठक चल ही रही थी कि इसी बीच क्षेत्र में डीएम के दौरे की जानकारी मिलते ही एसडीए जीप में बैठकर निकलने लगे। इसकी जानकारी होते ही बड़ी तादाद में लेखपाल वहां पहुंच गए और एसडीएम का घेराव कर नारेबाजी शुरू कर दी।
लेखपालों को होमगार्डों व अर्दली ने रोकने व समझाने की कोशिश की, मगर हंगामा नहीं थमा। लेखपाल एसडीएम के विरुद्ध नारेबाजी तेज करते जा रहे थे। आक्रोशित लेखपालों ने एसडीएम को गाड़ी से उतरने को मजबूर करने के लिए वाहन का गेट खोल दिया। हंगामा बढ़ता देख एसडीएम जीप से उतरे और सीधे कक्ष में पहुंच गए। वहां भी जमकर हंगामा हुआ। इसकी जानकारी मिलते ही सीओ जलालपुर कृष्णकांत शुक्ल के अलावा आलापुर, जहांगीरगंज, कटका, मालीपुर, जैतपुर व जलालपुर थानाध्यक्ष टीम के साथ तहसील परिसर पहुंच गए। इस मामले में एसडीएम ने देर शाम तीन लेखपालों को निलंबित कर दिया। इनमें से एक रामसिधार लेखपाल संघ के तहसील इकाई अध्यक्ष हैं। दो अन्य लेखपाल जगदेव पांडेय व रामसजीवन वर्मा को भी निलंबित किया गया है।
लेखपालों पर दर्ज हुआ केस
तहसील में हुए हंगामे को लेकर एसडीएम आलापुर मोहनलाल गुप्त ने जहांगीरगंज थाने में दर्ज कराए केस में कहा है कि दिन में करीब सवा 12 बजे जब वे जीप में बैठकर जा रहे थे, तो लेखपाल रामसिधार व जयदेव पांडेय सहित लगभग 25 लेखपालों ने नारेबाजी करते हुए गाड़ी को घेर लिया। दोनों लेखपालों ने गाड़ी का दरवाजा जबरन खोल दिया और जूता निकालकर मारने की बात कहने लगे। लेखपाल रामसजीवन वर्मा व अन्य की ओर से भी गालीगलौज किया गया। तहरीर में कहा गया कि लेखपाल रामसिधार ने कहा कि यदि आप कोई कार्रवाई करते हैं, तो मैं आपके विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज कराऊंगा। एसडीएम की तहरीर के बाद जहांगीरगंज पुलिस ने तीनों नामजद लेखपाल तथा अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया।
अधिवक्ताओं ने शांत कराया मामला
एसडीएम जब अपने कक्ष में पहुंचे, तो वहां भी लेखपालों ने जमकर भड़ास निकाली। नारेबाजी की और कहा कि अक्सर अभद्र भाषा का प्रयोग एसडीएम की ओर से किया जाता है। इसी के चलते धैर्य अब जवाब दे गया है। हंगामा होता देख तहसील के कई वरिष्ठ अधिवक्ता एसडीएम कक्ष पहुंचे और बीचबचाव कर हंगामा शांत कराया। लेखपाल इसके बाद कक्ष से बाहर निकल गए। तब जाकर एसडीएम तहसील परिसर से डीएम के दौरे की तरफ निकल सके।
जिम्मेदारी का किया निर्वहन
एसडीएम मोहनलाल गुप्त ने कहा कि मैंने निर्वाचन से जुड़े कार्य में लापरवाही बरतने तथा बैठक में मांगी जा रही जानकारी का मर्यादित ढंग से उत्तर न देने आदि को लेकर संबंधित लेखपाल को नोटिस दिया था। जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। इसके बावजूद लेखपालों की ओर से अनैतिक आचरण किया गया। राजकीय कार्य को संपन्न कराने के लिए जो भी प्रयास किए जाते हैं, वह सामूहिक जिम्मेदारी का परिणाम होता है। इसी भावना के साथ हम सभी को कार्य करने की जरूरत होती है। मैं इसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा था।
मान-सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
लेखपाल संघ के स्थानीय अध्यक्ष रामसिधार ने कहा कि एसडीएम का रवैया काफी दिनों से अभद्र था। उनकी ओर से अशिष्टता पूर्ण आचरण किया जा रहा था। लेखपालों को अभद्र भाषा में बुलाने या डांटने का अधिकार उन्हें नहीं है। लेखपाल कोई बंधुआ मजदूर नहीं हैं। हम सब सरकारी काम का पूरा निर्वहन करते हैं और करेंगे, लेकिन व्यक्तिगत मान सम्मान से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को भी अपनी सीमा का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि किसी लेखपाल के साथ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई, तो संगठन आरपार की लड़ाई लड़ेगा।
संयम से लेना था काम
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष केजी मिश्र ने कहा कि मंगलवार को तहसील में जो कुछ हुआ, वह अत्यंत दुर्भाग्ग्य पूर्ण था। इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी। लेखपालों को यदि एसडीएम से कोई शिकायत थी, तो इसके लिए डीएम से मिलकर अपना पक्ष रखना था। संस्कार विहीन आचरण की कोई जरूरत नहीं थी। ऐसे मामलों में ज्यादा धैर्य व संयम के साथ आगे आने की जरूरत होती है।
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