अंबेडकरनगर। समाज व देश को विकास के पथ पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तमाम शिक्षकों ने कोरोना संकट में भी अपने दायित्व का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन किया। कोरोना संकट के बीच जब विद्यालय बंद पड़े थे, तो ऐसे में शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा दी। जिन क्षेत्रों मेें नेटवर्क की समस्या थी, वहां शिक्षकों ने अलग-अलग स्थानों पर कोरोना प्रोटोकॉल के बीच पांच-पांच छात्र-छात्राओं का समूह बनाकर उन्हें शिक्षा दी। तमाम शिक्षक तो ऐसे भी थे, जिन्होंने न सिर्फ कोरोना संकट में जान जोखिम में डालकर उन्हें शिक्षा दी, बल्कि मास्क व सैनिटाइजर तक का भी वितरण उनमें किया। ऐसे शिक्षकों की संबंधित क्षेत्र के नागरिकों ने बढ़-चढ़कर सराहना भी की।
5 सितंबर को शिक्षक दिवस उल्लास के साथ मनेगा। इस दिन शिक्षकों की भूमिका को प्रमुखता से याद किया जाएगा। दरअसल शिक्षक उस कुम्हार की तरह होते हैं, जो छात्र-छात्राओं के भविष्य को उज्ज्वल करते हैं। उन्हें बेहतर शिक्षा देते हैं, जिससे वे आगे बढ़कर समाज व देश का नाम रोशन कर सकें। कोरोना संकट में जब आम नागरिक सहमा हुआ था और घर से बाहर अत्यंत जरूरी कार्य पड़ने पर ही निकल रहा था, तो ऐसी संकट की घड़ी में भी जान जोखिम में डालकर जिले के तमाम शिक्षक ऐसे थे, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए छात्र-छात्राओं को या तो ऑनलाइन शिक्षा दी या फिर नेटवर्क समस्या के चलते संबंधित क्षेत्र में कोरोना प्रोटोकॉल के बीच पांच-पांच बच्चों के समूह को पढ़ाते नजर आए। इतना ही नहीं, कुछ शिक्षक ऐसे भी थे, जिन्होंने न सिर्फ बच्चों को शिक्षा दी, बल्कि स्वयं व्यवस्था कर उन्हें मास्क व सैनिटाइजर भी उपलब्ध कराया।
बच्चों का समूह बनाकर कराई पढ़ाई
उच्च प्राथमिक विद्यालय भाऊकुआं की सहायक अध्यापक सुमन सिंह ने बताया कि अनलॉक प्रक्रिया के बीच जब स्कूल बंद चल रहे थे, तो बच्चों का किसी भी प्रकार से नुकसान न हो, इसके लिए उन्होंने गांव में अलग-अलग स्थान पर सोशल डिस्टेंसिंग के बीच पांच-पांच बच्चों का समूह बनाकर उन्हें शिक्षा दी। इतना ही नहीं, उनमें मास्क का भी वितरण किया। इसका परिणाम भी सामने आया। अब जबकि स्कूल फिर से खुल गए हैं, तो उस समय की गई पढ़ाई काम आ रही है। इसी विद्यालय के सहायक अध्यापक महेंद्र प्रसाद ने भी गांव-गांव जाकर बच्चों का छोटा समूह बनाकर उन्हें शिक्षा दी। महेंद्र ने कहा कि बच्चों को पढ़ाकर जो सुकून उन्हें मिला, उसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता है।
छोटे समूह में दी शिक्षा
प्राथमिक विद्यालय विजयगांव की प्रधानाध्यापिका मंगेशलता ने बताया कि कोरोना संकट के बीच जब स्कूल बंद चल रहा था, तो बच्चे इधर-उधर घूम रहे थे। यह देखकर अच्छा नहीं लगा। ठान लिया कि वे छोटा-छोटा समूह बनाकर बच्चों को शिक्षा देंगी। इसके बाद गांव-गांव जाकर पांच-पांच बच्चों का समूह बनाया और फिर इसके बाद शिक्षा देना शुरू कर दिया। इसका बच्चों ने लाभ भी उठाया।
जगह-जगह लगाई पाठशाला
उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव की श्वेता सिंह ने बताया कि कोरोना संकट के चलते पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए गांव में जगह-जगह पाठशाला का आयोजन कर बच्चों को शिक्षा दी। इसमें छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अभिभावकों ने भी काफी सहयोग किया। कोरोना योद्धा से सम्मानित श्वेता सिंह ने कहा कि उनकी हमेशा से मंशा रही है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा सके, जिससे न सिर्फ समाज, बल्कि देश का विकास तेजी से हो सके।
सम्मानित होंगे उत्कृष्ट कार्य करने वाले 75 शिक्षक
शिक्षक दिवस के मौके पर रविवार को उत्कृष्ट कार्य करने वाले 75 शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। बीएसए भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कोरोना संकट में संबंधित शिक्षक व शिक्षिकाओं की ओर से ऑनलाइन पठन पाठन का कार्य किया गया था। साथ ही विद्यालय में छात्र-छात्राओं के नामांकन में भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया। इसके अलावा ई पाठशाला में संबंधित शिक्षकों ने बेहतर योगदान दिया था। ऐसे शिक्षकों को रविवार को शिक्षक दिवस के मौके पर जिला पंचायत सभागार में सम्मानित किया जाएगा। इन शिक्षकों को मुख्य अतिथि जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन सम्मानित करेंगे। बताया कि कार्यक्रम के आयोजन में कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।