मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने शनिवार को यहां कहा कि प्रदेश के कुछ अधिकारी ऐसे हैं जो यह चाह रहे हैं कि जनता सरकार से नाराज होती रहे। वे जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं, जिससे यह सरकार हट जाए। अधिकारियों के रवैये को लेकर पहले भी मुखर हो चुके संजय निषाद ने एक बार फिर अधिकारियों के प्रति अपने तेवर तल्ख किए हैं।
शनिवार को जिले में पहुंचे संजय निषाद ने कहा कि अधिकारियों की मंशा है कि नेता, कार्यकर्ता व आम लोग आक्रोशित हों। उन्होंने गोंडा जिला प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज सुबह ही कुछ लोग मुझसे मिले। वहां एक मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी में लापरवाही बरती जा रही है। लोग मुझे वहां बुलाना चाहते हैं। मेरे जाने पर वहां भीड़ जुटती। कोई अनहोनी हो सकती थी। अधिकारियों को यह सब समझना चाहिए। मंत्री ने अपने बेटे व विधायक सरवन निषाद की सुरक्षा वापस लेने को भी अनुचित करार दिया। कहा कि उन्हें धमकी मिली थी। सुरक्षा तब वापस होती जब या तो अपराधी जेल चले गए होते या फिर देश छोड़ गए होते। ऐसा हुए बिना सुरक्षा वापस लेने पर यदि कोई अनहोनी होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों के नाम लिखने की अनिवार्यता पर कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने नाम, जाति व धर्म पर गर्व करना चाहिए। नाम लिखने का कोई नया नियम नहीं है। यह काफी पुराना है। यह शिकायत भी मिलती है कि कहीं ढाबे पर मां वैष्णो लिखा होता है, लेकिन अंदर की हकीकत कुछ और होती है। यदि मक्का मदीना जाने पर अली की दुकान हो और खली का काम हो तो कैसा लगेगा। विपक्ष सिर्फ मुसलमानों का नाम क्यों ले रहा है। यह नियम तो सबके लिए है। गोरखनाथ मंदिर में ही दर्जनभर से अधिक दुकान मुसलमानों की है। उन्हें तो कोई दिक्कत नहीं है फिर अन्य जगहों पर क्यों दिक्कत हो रही है।