सिकंदरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित होता आयुर्वेदिक अस्पताल।
अंबेडकर। जिले के 41 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में दवाओं का टोटा है। हजपुरा क्षेत्र के सिकंदरपुर, टांडा, बसखारी, इल्तिफातगंज व कहरा सुलेमपुर समेत अन्य अस्पतालों में मौजूदा समय में दवाओं की भारी कमी है। ऐसे में मरीजों को इलाज कराने सीएचसी-पीएचसी जाना पड़ रहा है। पहले जहां आयुर्वेदिक अस्पतालों में करीब तीन से चार हजार मरीजों का इलाज होता था। वही, अब इसकी संख्या भी काफी घट गई हैं।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में मौजूदा समय में त्रिफला चूर्ण, अर्जन, अश्वगंधारिष्ट, महानारायण तेल, आयुष चौसठ, दशमूलारिष्ट, हरण बहेडा व आयुष चौसठ समेत बड़ी संख्या में दवाओं की कमी है। गौरतलब है कि कोरोना के बाद से आयुर्वेदिक औषधियों की ओर लोगों का काफी तेजी से रुझान हुआ था। आलम यह था कि जहां पर पहले आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों मरीजों की इक्का-दुक्का भीड़ हुआ करती थी, वहीं अब इन अस्पतालों में काफी मरीज आ रहे हैं। वहीं अस्पतालों में दवाओं के अभाव के कारण लोगों को मायूसी हाथ लगती है। हजपुरा के रहने वाले संतोष ने बताया कि अस्पताल से जो दवाएं मिलती हैं वह काफी असर करती हैं। इधर कई महीने से दवाओं की उपलब्धता न होने के कारण थोड़ी समस्या जरूर हुई है।
इस बाबत जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. रणजीत कुमार ने बताया कि शासन के पास दवाओं का मांग पत्र भेजा गया है। एक सप्ताह के भीतर दवाएं आ जाएंगी। धीरे-धीरे दवाओं की कमी पूरी हो रही है।