अंबेडकरनगर। कहते हैं अगर जज्बा हो तो संसाधनों की कमी भी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भीटी ब्लॉक के रिउना गांव की रहने वाली वंदना ने। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में उन्होंने घर से ही मसाला निर्माण का छोटा उद्योग शुरू किया, जो आज कई महिलाओं के आत्मसम्मान का कारण बन गया है।
अप्रैल 2025 में वंदना ने अपने घर के एक छोटे कमरे से मसाले तैयार करने की शुरुआत की थी। वह हल्दी, धनिया, मिर्च, खड़ा मसाला और बेसन जैसे उत्पाद तैयार करती हैं। शुरुआत में उत्पादन सीमित था, लेकिन गुणवत्ता और स्वाद ने ग्राहकों का दिल जीत लिया। आज उनका ब्रांड धीरे-धीरे गांव से बाहर तक पहचान बना चुका है। अब वह अपने मसालों की थोक सप्लाई सुल्तानपुर और अयोध्या जिलों के कई दुकानदारों को भी कर रही हैं। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आस-पास के शहरों में भी उनके उत्पादों की मांग बढ़ी है। वंदना का कहना है कि वह चाहती हैं कि गांव की महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी हों। थोड़ा-थोड़ा शुरू करें, मेहनत और ईमानदारी से काम करें तो सफलता खुद रास्ता बनाती है।