अंबेडकरनगर। जनपद की 899 ग्रामपंचायतों में राजस्व कार्य निपटाने के लिए लेखपालों के 476 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष 239 पदों पर ही तैनाती है, जबकि 240 पद रिक्त हैं। इससे एक-एक लेखपाल पर 10-10 गांव का अतिरिक्त प्रभार है। लेखपालों पर अतिरिक्त बोझ के चलते राजस्व गांवों के साथ-साथ तहसीलों में भी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
ये कार्य हो रहे प्रभावित
लेखपालों की कमीं से खसरा की नकल, चकरोड नपवाना, अवैध कब्जा हटवाने के अलावा स्कूली छात्रों के आय, जाति व निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। हाल यह है कि अपने कार्य कराने के लिए किसान, काश्तकार, व्यापारी, छात्र दूर दराज से तहसील कार्यालय तो पहुंचते हैं, लेकिन लेखपालों के न मिलने की वजह से उन्हें मायूस लौटना पड़ता है। इसके अलावा जिले की समस्त ग्राम सभाओं में अंश निर्धारण व खतौनी बनाने को लेकर लेखपालों और राजस्व विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। खसरा फीडिंग समेत ऑनलाइन खसरा सत्यापन का कार्य भी किया जाना है। इसके साथ ही वरासत, सीमा निर्धारण चिह्नों का निर्धारण समेत अन्य वादों के क्रियान्वयन की प्रकिया भी लेखपालों की कमी के चलते प्रभावित हो रही है।
मायूस लौट रहे किसान
अकबरपुर तहसील के प्रतापपुर चमुर्खा के सतीश कुमार, मदनगढ़ के दिनेश वर्मा, आशापुर के जगदीश प्रसाद, आदमपुर तिंदौली के राजकुमार, किशुनीपुर सरखने के सतीश कुमार, पतौना के शिवपूजन कुमार, बरामदपुर लोहरा सतीश सिंह, खजूरडीह के दिवाकर यादव, पहितीपुर के अशोक पांडेय, सुखारीगंज के केदार वर्मा, बंदनडीह के राजू आदि लोग सोमवार को लेखपाल की तलाश में पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा।
तहसील-स्वीकृत पद-तैनाती-रिक्त
अकबरपुर-117-60-57
आलापुर-104-48-56
जलालपुर-97-49-48
टांडा-94-45-49
भीटी-64-34-30
शासन को किया गया पत्राचार
जनपद में लेखपालों के स्वीकृत पद के सापेक्ष तैनाती काफी कम है। जितने लेखपाल हैं। उन्हीं से सरकारी कार्य कराए जा रहे हैं। यह ध्यान रखा जा रहा है कि कोई भी राजस्व कार्य बाधित न होने पाए। लेखपालों की कमी को पूरा करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
सदानंद गुप्त, एसडीएम