अंबेडकरनगर। दशकों से राजस्व कोर्ट का चक्कर लगाने के बाद भी फरियादियों को उनका हक नहीं मिल पाया है। उनके हाथ सिर्फ तारीख पर तारीख आ रही है। इससे उन्हें जहां एक तरफ आर्थिक चपत लग रही है, वहीं शारीरिक व मानसिक मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। हालत यह है कि जिले के अलग-अलग राजस्व न्यायालयों में 23305 मुकदमे लंबित हैं।
न्यायालयों में मुकदमों की लंबित संख्या को लेकर तमाम प्रयासों के बाद भी नतीजे सार्थक नहीं हो पा रहे। इसके कई कारण हैं। पदों का रिक्त होना इसमें जहां काफी महत्वपूर्ण है वहीं कभी अधिवक्ताओं की हड़ताल तो कभी संबंधित अधिकारियों की प्रशासनिक व्यस्तता के चलते सुनवाई नहीं हो पाती। इसी कारण लंबे समय से फरियादियों के बीच यह आवाज उठती आ रही है कि राजस्व मामलों के निस्तारण के लिए अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना कर अधिकारियों की तैनाती की जाए।
रिक्त पड़े पद भी अविलंब भरे जाएं। हालांकि, इन सबकी तरफ गंभीरता से ध्यान न देने का नतीजा है कि जिले में हजारों फरियादियों को प्रतिदिन अलग-अलग राजस्व न्यायालयों में हक की प्राप्ति के लिए चक्कर लगाने को विवश होना पड़ रहा है। इनमें कई वादकारी ऐसे हैं जो दशकों से राजस्व न्यायालयों की चौखट नाप रहे हैं। न्याय की आस में कई वादकारी हद दर्जे तक निराश हो चुके हैं। हालत यह है कि जिले के अलग-अलग राजस्व न्यायालयों में 23305 मामले इन दिनों लंबित हैं।
जिले के राजस्व न्यायालयों में 7573 मामले ऐसे हैं जो पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा 1870 मामले आलापुर एसडीएम कोर्ट के हैं। एसडीएम जलालपुर कोर्ट में पांच वर्ष से अधिक के 668, एसडीएम टांडा कोर्ट में 492 व एसडीएम अकबरपुर कोर्ट में 194 मामले लटके पड़े हैं। एसडीएम भीटी कोर्ट में सिर्फ 32 मामले चले आ रहे हैं। तहसीलदार जलालपुर कोर्ट में पांच वर्ष से अधिक के 769, टांडा में 330, आलापुर में 333, भीटी में 120 जबकि अकबरपुर तहसीलदार कोर्ट में 90 मामले लंबित हैं। नायब तहसीलदार जलालपुर कोर्ट में पांच वर्ष से अधिक के 510 तो नायब तहसीलदार अकबरपुर कोर्ट में 48 मुकदमों का निस्तारण प्राथमिकता पर नहीं हो पा रहा है।
डीएम कोर्ट राजस्व मामलों के निस्तारण में अव्वल है। यहां पांच वर्ष से अधिक का सिर्फ एक मामला लंबित है। वादों के निस्तारण का प्रतिशत 87 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि वादों के निस्तारण मामले में एडीएम कोर्ट ने सवा एक सौ प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की है। एडीएम कोर्ट में पांच वर्ष से अधिक के 116 मामले लंबित हैं।
राजस्व मामलों का तेजी से निस्तारण न हो पाने के पीछे तमाम पदों का खाली पड़ा रहना है। हालत यह है कि अपर जिलाधिकारी न्यायिक का एक पद रिक्त है। उप जिलाधिकारी न्यायिक जलालपुर का पद खाली चला आ रहा है। तहसीलदार न्यायिक अकबरपुर व तहसीलदार न्यायिक टांडा का पद रिक्त है। नायक तहसीलदार सिकंदरपुर, टांडा, बसखारी, भियांव, रामनगर, जहांगीरगंज, भीटी व कटेहरी का पद रिक्त चला आ रहा है। जिले में कुल 27 राजस्व न्यायालय हैं। इनमें से 12 कोर्ट खाली पड़ी हैं।
अकबरपुर तहसील अन्तर्गत पीरपुर निवासी चौथी ने बताया कि उनकी दो बीघा भूमि को लेकर उनका विवाद बुआ से है। संबंधित भूखंड पुश्तैनी है, संबंधित ने कब्जा कर रखा है। इसका मुकदमा लगभग 25 वर्ष से तहसीलदार कोर्ट में चल रहा है। अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है। हाथपाकड़ निवासी कासिम अली ने बताया कि 16 बिस्वा भूखंड का विवाद भाइयों से चला आ रहा है। लगभग दस वर्ष से बंदोबस्त कोर्ट में केस चल रहा है, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। सिर्फ तारीख पर तारीख पड़ती जाती है।
जलालपुर तहसील अन्तर्गत लारपुर निवासी शंकर ने बताया कि पैतृक संपत्ति पर बड़े भाई छोटू का कब्जा है। पिता के निधन के बावजूद उन्हें हिस्सेदारी नहीं मिल पा रही है। हक को लेकर चकबंदी में वाद दायर किया है। लगभग 22 वर्ष हो गए, लेकिन अब तक हिस्सेदारी नहीं मिल सकी। जलालपुर तहसील अन्तर्गत भियांव निवासी रामकिशोर ने बताया कि गांव के ही विपक्षियों ने एक बीघा भूखंड पर कब्जा कर रखा है, जबकि संबंधित भूखंड उनका पुश्तैनी है। इसे लेकर विपक्षियों से कई बार विवाद भी हो चुका है। न्याय के लिए एडीएम कोर्ट में 1995 में वाद दायर किया था, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिल सका है।
राजस्व कोर्ट से जुड़े मामलों में तेजी लाई जा रही है। बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं। नियमित समीक्षा की जाती है। आने वाले दिनों में और ज्यादा निस्तारण कराए जाएंगे।
- राकेश कुमार मिश्र, डीएम