केदारनगर। क्षेत्र के सेवागंज करमपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को कृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक पंकज शास्त्री ने बताया कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध परिवर्तन समय के साथ अनिवार्य होता है।
कठिन परिस्थितियों में विवेक और साहस से लिया गया निर्णय भविष्य की दिशा तय करता है। धर्म का अर्थ केवल आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और कर्तव्यबोध भी है। संकट की घड़ी में संयम और धैर्य व्यक्ति को सही मार्ग पर बनाए रखते हैं। समाज में सकारात्मक बदलाव व्यक्तिगत जिम्मेदारी से प्रारंभ होता है। द्वापर युग में मथुरा का वातावरण अत्याचार, भय और अन्याय से ग्रस्त था। कंस के शासनकाल में आमजन त्रस्त थे और धर्म का ह्रास हो चुका था। इसी पृष्ठभूमि में देवकी और वासुदेव के यहां कृष्ण का जन्म हुआ। कथा के दौरान कारागार में जन्म, वासुदेव की ओर से शिशु को गोकुल ले जाने और यमुना पार करने की घटनाओं का वर्णन किया गया।