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बूस्टर डोज लगवाने के लिए ढीली करनी होगी जेब

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अंबेडकरनगर। कोविड से बचाव के लिए इम्युनिटी बूस्टर डोज लगवाने के लिए नागरिकों को अब अपनी जेबें ढीली करनी पड़ेगी। फिलहाल जिला मुख्यालय के दो अस्पतालों को बूस्टर डोज लगाने के लिए चिंहित किया गया है। 18 से 59 आयु वर्ग के नागरिकों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए अब 250 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के नागरिक, फ्रंटलाइन वर्कर व स्वास्थ्यकर्मियों को यह सुविधा आगे भी नि:शुल्क मिलेगी।
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कोरोना महामारी का खतरा भले ही जिले में कम हो, लेकिन इसके लिए एहतियात अभी जारी है। कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके नागरिकों को स्वास्थ्य विभाग बूस्टर डोज भी लगा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बूस्टर डोज लगवाने से इम्युनिटी बेहतर होगी। इससे कोरोना का खतरा कम होगा। कोविड वैक्सीन के साथ ही बूस्टर डोज सभी नागरिकों को मुफ्त में लगायी जा रही थी। इस बीच अब स्वास्थ्य विभाग ने बूस्टर डोज को लेकर नया फरमान जारी कर दिया। 18 से 59 आयु वर्ग के आम नागरिकों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए अब लगभग 250 रुपये का भुगतान करना होगा। नागरिकों को बूस्टर डोज लगाने के लिए फिलहाल जिला मुख्यालय पर अभी साकेत व रमा हॉस्पिटल को चिह्नित किया गया है। इन अस्पतालों को निर्देश है कि जल्द से जल्द बूस्टर डोज मंगा लें, जिससे नागरिक अस्पताल पर पहुंचकर डोज लगवा सकें।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बूस्टर डोज की सुविधा 60 वर्ष से अधिक के नागरिकों, फ्रंटलाइन वर्करों व स्वास्थ्यकर्मियों को यह सुविधा आगे भी निशुल्क रूप से प्रदान की जाएगी। अब तक जिले में 28 हजार 527 नागरिकों को बूस्टर डोज निशुल्क रूप से लगाया जा चुका है। रमा हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. ज्योति वर्मा ने बताया कि वैक्सीन मंगवाने के लिए भारत बायोटेक कंपनी से बात हुई है। गाइडलाइन के अनुसार 3 हजार डोज एक बार में मिलेगी। इसी सप्ताह के अंत तक डोज उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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आगे नहीं आ रहे अस्पताल
बूस्टर डोज लगाने के लिए निजी अस्पताल संचालक आगे नहीं आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बूस्टर डोज लगाने के लिए पूर्व में चिह्नित हुए अस्पताल ही आगे आए हैं। अन्य नए अस्पताल बूस्टर डोज लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कारण यह कि शासन का निर्देश है कि एक बार में कम से कम 3 हजार डोज की डिलेवरी लेनी होगी। इसके अलावा एक वायल में 10 डोज होता है, इसका सील तोड़ने के बाद डोज लगाकर खत्म करना जरूरी होता है। क्योंकि इसे ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। ऐसे में यदि 10 नागरिक नहीं पहुंचेंगे तो अस्पताल प्रबंधन को बूस्टर डोज लगाने में कठिनाई आएगी। इसके चलते निजी अस्पताल इस मुसीबत में नहीं फंसना चाह रहे। एक निजी अस्पताल के संचालक ने बताया कि यदि सामान्य वैक्सीन की तरह इसे भी सिंगल डोज में कर दिया जाए तो बेहतर रहेगा। इससे डोज को सुरक्षित रखने की मुसीबत से छुटकारा मिल जाएगा, जो अस्पताल पहुंचेगा उसे सुचारु रूप से डोज लग सकेगा।
दिए जा रहे जरूरी दिशा-निर्देश
बूस्टर डोज लगाने के लिए दो अस्पताल चिह्नित हो चुके हैं। जल्द ही और अस्पतालों का चयन सुनिश्चित होगा। अस्पतालों द्वारा जो सुझाव दिए जा रहे हैं, उस पर भी अमल करते हुए अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। -डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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