अंबेडकरनगर। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही। जिले में 12 बैंकों की 100 शाखाओं के कर्मचारी हड़ताल पर रहे तो बैंकों में ताला लटका रहा। इससे उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गईं। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ता जगह-जगह परेशान दिखे।
धननिकासी समेत विभिन्न कार्यों के लिए उपभोक्ता संबंधित बैंक शाखाओं में पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी। हड़ताल से लगभग एक अरब रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। उधर बैंक कर्मचारियों ने विभिन्न बैंक शाखाओं के समक्ष प्रदर्शन कर हक की आवाज बुलंद की। कहा गया कि यदि शीघ्र ही निजीकरण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस के राष्ट्रीय आह्वान पर गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। शुक्रवार को भी 12 बैंकों की लगभग 100 शाखाओं में शुक्रवार को भी कार्य पूरी तरह से ठप रहा। बैंकों में ताला लटका होने के चलते शुक्रवार को उपभोक्ता विभिन्न कार्यों के लिए संबंधित शाखाओं पर पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। बगैर काम हुए ही उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
उपभोक्ताओं का कहना था कि उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए बैंकों में जरूरी कार्य सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए जिम्मेदारों को वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
अकबरपुर नगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में धन जमा करने पहुंचे बेवाना के राजितराम व शहजादपुर के मोहम्मद अमीन ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बैंक में हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। जिम्मेदारों को चाहिए था कि उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करें। कहा कि हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को कई प्रकार की मुश्किलें उठानी पड़ीं।
अकबरपुर के शहाब परवेज व अनुराग ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अकबरपुर शाखा में धननिकासी के लिए गए थे। हड़ताल के चलते काम नहीं हुआ। एटीएम भी काम नहीं कर रहे। ऐसे में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़। शहजादपुर की संगीता सिंह ने कहा कि फीस के लिए बेटे के खाते में राशि भेजनी थी, लेकिन हड़ताल के चलते फीस नहीं भर सकी।
बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन कर बुलंद की आवाज
हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन कर अधिकार की आवाज बुलंद की। संगठन के प्रांतीय उपमहामंत्री आशुतोष सिंह ने कहा कि निजीकरण से कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। निजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर जब भी धरना प्रदर्शन किया गया, तो सिर्फ आश्वासन ही दिया गया। इससे आगे प्रक्रिया नहीं बढ़ी। निजीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी है। इसे देखते हुए ही हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा।
बैंक कर्मचारी उमेश सिंह व प्रमोद कुमार ने कहा कि निजीकरण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजीकरण होने से तमाम बैंक शाखाएं समाप्त हो जाएंगी। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। इस प्रकार की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही निजीकरण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस दौरान राघवेंद्र, अनिल कुमार, उदयभान सिंह, आशीष शुक्ला आदि मौजूद रहे।
एटीएम में कैश नहीं
निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मियों की हड़ताल का प्रतिकूल प्रभाव एटीएम सेवा पर भी पड़ा। शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर विभिन्न बैंकों के लगे तीन दर्जन से अधिक एटीएम की तुलना में ज्यादातर के शटर शुक्रवार को नहीं खुल सके। जिनके शटर खुले भी, तो कहीं कैश नहीं था, तो कहीं जल्दी ही कैश समाप्त हो गया। नतीजा यह रहा कि धननिकासी के लिए उपभोक्ताओं को एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ा। अकबरपुर के आलोक कुमार व शहजादपुर के गोलू तिवारी ने कहा कि वे धननिकासी के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते रहे लेकिन धननिकासी नहीं हो सकी। कहीं शटर नहीं खुला, तो कहीं कैश नहीं था।
आज खुलेेंगे बैंक
12 बैंक की लगभग 100 शाखाओं में हड़ताल के चलते शुक्रवार को भी लगभग एक अरब रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। दो दिन की हड़ताल के बाद शनिवार को बैंक पूर्व की तरह ही खुलेंगे और कर्मचारी सुचारु रूप से कार्य करेंगे।
- आशीष कुमार सिंह, एलडीएम