जुलाई के पहले ही सप्ताह में जिले में एमडीएम व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी होकर रह गई है। जिले में कुल दो हजार 19 विद्यालयों के सापेक्ष 606 विद्यालयों में एमडीएम योजना के तहत चूल्हे नहीं जल सके। वहीं, सभी विद्यालयों में शौचालय निर्माण की योजना भी धराशाई होकर रह गई है।
जिले के 177 परिषदीय विद्यालयों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। तमाम शिकायतों के बाद इसे गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने बीएसए के माध्यम से सभी बीईओ को विद्यालयों में शौचालय के समक्ष खड़े होकर फोटो खिंचवाने एवं एमडीएम न बनने के कारणों की जानकारी देने का निर्देश दिया है।
छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा ग्रहण कराने को लेकर शासन द्वारा नए-नए विद्यालयों का निर्माण तो कराया जा रहा है, लेकिन इसमें अध्यनरत छात्र-छात्राओं को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन तनिक भी गंभीर नहीं है। इसी का नतीजा है कि परिषदीय विद्यालयों से छात्र-छात्राओं व अभिभावकों का मोहभंग हो रहा है।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में ही एमडीएम योजना जिले में औंधे मुंह गिरी है। ऐसा तब है, जब योजना का सुचारु लाभ दिलाने के लिए शासन से विभाग को एक करोड़ 66 लाख रुपये बजट बीते दिनों ही उपलब्ध करा दिया गया था।
इसके बाद भी जुलाई में स्कूल खुलने के प्रथम सप्ताह में दो हजार 19 विद्यालयों के सापेक्ष 606 विद्यालयों में एमडीएम योजना पूरी तरह ठप है। इसे गंभीरता से लेते हुए सीडीओ डॉ. मन्नान अख्तर ने बीएसए के माध्यम से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित विद्यालयों में जाकर एमडीएम न बनने के कारणों की जानकारी उपलब्ध कराएं।
परिषदीय विद्यालयों में शौचालय निर्माण योजना भी जिले में औंधे मुंह गिरकर रह गई है। छात्र-छात्राओं को शौच के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए सभी परिषदीय विद्यालयों में शौचालय निर्माण की योजना सर्वशिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार ने चलाई थी।
योजना का समुचित लाभ दिलाने को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के 177 परिषदीय विद्यालयों में अब तक शौचालय निर्माण नहीं हो सका है। इसके अलावा जो शौचालय बने भी हैं, उनमें अधिकांशत: निष्प्रयोज्य पड़े हैं।
ऐसे में अब सीडीओ डॉ. मन्नान अख्तर ने बीएसए के माध्यम से सभी बीईओ को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्थित विद्यालयों में शौचालय के समक्ष खड़े होकर फोटो खिंचवाएं, जिससे शौचालय की सही स्थिति की जानकारी हो सके।
साथ ही जिन विद्यालयों में शौचालय नहीं हैं, वहां वे विद्यालय के समक्ष खड़े होकर फोटो खिंचवाएं। इसके बाद समूची रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। इसमें यदि किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई, तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बीएसए डॉ. राजबहादुर मौर्य ने कहा कि एमडीएम को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।