आलापुर (अंबेडकरनगर)। ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर निर्माण के लिए जमीन खोजे नहीं मिल पा रही है। सेटेलाइट सर्वे की तस्वीर के इतर भौतिक तौर पर उपलब्ध सूची राजस्व व ब्लॉक कर्मियों की मुसीबत बढ़ा रही है। सेटेलाइट के माध्यम से ली गई तस्वीरों के आधार पर जिस भूमि को अमृत सरोवर निर्माण के लिए चिन्ह्ति किया गया है, उनमें से अधिकांश जमीन पहले से ही तालाब, नदी, बाग, कब्रिस्तान आदि में दर्ज हैं। इसके चलते ही रामनगर के 19 ग्राम पंचायत व जहांगीरगंज के 17 ग्राम पंचायतों की सूची के भौतिक सत्यापन में अब तक महज 9 गांवों में ही सरोवर के लिए भूमि की खोज का कार्य पूरा हो पाया है।
गिरते भूगर्भ जल स्तर को ठीक करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से अमृत सरोवर योजना का संचालन शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायतों में खाली पड़ी भूमि पर मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवर का निर्माण कराया जाना है ताकि बरसात के पानी को सुरक्षित कर भूगर्भ के गिरते जल स्तर को बेहतर बनाया जा सके। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए बीते दिनों आलापुर तहसील क्षेत्र के रामनगर व जहांगीरगंज विकास खंडों में अमृत सरोवर निर्माण के लिए 36 गांवों का चयन हुआ था। देशांतर व अक्षांश रेखा के आधार पर संबंधित गांवों की सेटेलाइट के माध्यम से ली गयी तस्वीरों के बाद चिह्नित हुई खाली जमीन की सूची तहसील व ब्लॉक प्रशासन को उपलब्ध करायी गयी ताकि संबंधित भूखंड पर अमृत सरोवर का निर्माण कराया जा सके।
सेटेलाइट से ली गई तस्वीर से अमृत सरोवर के लिए चिह्नित हुई भूमि का भौतिक सत्यापन कर तलाशना अब तहसील कर्मचारियों के लिए गले की फांस बन गया है। करीब एक पखवारे से टीम अलग अलग गांवों में जाकर जमीन की खोज में जुटी है लेकिन तमाम गांवों में उन्हें सफलता नही मिल पा रही है। सेटेलाइट तस्वीर में जिस जमीन को सरोवर बनाने के लिए चिन्ह्ति किया गया है वह जमीन पहले से ही राजस्व अभिलेखों में भूमि नदी, तालाब, बाग, कब्रिस्तार आदि के नाम पर दर्ज है। इसके चलते ही रामनगर ब्लॉक के 19 गांवों में से 5 गांव भौरा, इटहिया सुंदरपुर, इंदईपुर व मनेरीपुर सरावां व जहांगीरगंज में पांच गांव ऐनवां, केदरुपुर, भरतपुर, कुरांव व कादीपुर फरीदपुर में भूमि ही अब तक खोजी जा सकी है। खंड विकास अधिकारी रामनगर सुभाषचन्द्र सरोज ने बताया कि यदि चयनित ग्राम पंचायतों में भूमि उपलब्ध नही हो पाती है, तो दूसरे ग्राम पंचायतों में तलाश की जाएगी।