अंबेडकरनगर। महंगाई की मार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। लगातार रसोई गैस सिलिंडर के बढ़ते दाम का असर यह है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की ओर से गैस सिलिंडर की रिफिलिंग ही नहीं कराई जा रही है। हालत यह है कि योजना का लाभ लेने वाले एक लाख 55 हजार लाभार्थियों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत लाभार्थी ही रिफिलिंग करा रहे हैं। ऐसे में लाभार्थियों को फिर से खाना बनाने के लिए चूल्हे का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
एक मई 2016 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए जाने का प्राविधान रखा गया था। दरअसल योजना के तहत निशुल्क कनेक्शन के साथ ही मुफ्त रसोई गैस सिलिंडर, रेगुलेटर व पाइप भी दिया, तो इसका बढ़-चढ़कर स्वागत भी हुआ। कारण यह कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की महिलाओं को चूल्हे पर खाना बनाने से छुटकारा मिल गया था।
हालांकि समय बीतने के साथ जैसे-जैसे रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ते गए, वैसे-वैसे उज्ज्वला योजना का लाभ ले रहे उपभोक्ताओं का मोह योजना से भंग होता गया। दरअसल जिस समय योजना की शुरुआत हुई थी, उस समय रसोई गैस सिलिंडर का दाम 585 रुपये था। लगभग छह वर्ष बाद अब रेट बढ़कर 1062 रुपये प्रति सिलिंडर हो गया है। लगातार बढ़ते दाम का ही नतीजा रहा कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की ओर से रिफिलिंग कराया जाना कम होने लगा।
मौजूदा समय में योजना के एक लाख 55 हजार लाभार्थियों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत लाभार्थी ही रिफिलिंग करा रहे हैं। शेष लाभार्थियों के रसोई गैस सिलिंडर सिर्फ रसोई घर की शोभा ही बढ़ा रहे हैं। पेट्रोलियम कंपनी के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब साधन संपन्न व्यक्ति को सिलिंडर रिफिलिंग कराने में समस्या हो रही है, तो योजना के लाभार्थी किस प्रकार से रिफिलिंग कराएंगे। उधर, सेल्स ऑफिसर इंडियन ऑयल एसके सोनी ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत जिले में बीते कुछ समय से कम लाभार्थियों की ओर से ही रिफिलिंग कराई जा रही है।
चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर
चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर पहितीपुर निवासी नीलम अग्रहरि ने कहा कि महंगाई इतनी अधिक है कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। रसोई गैस सिलिंडर का दाम इतना अधिक हो गया है कि अब इसकी रिफिलिंग कराना मुश्किल हो गया है। यदि सिलेंडर की रिफिलिंग कराएंगे, तो घर का खर्च चलाने में दिक्कत होगी। ऐसे में अब मजबूरन चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। यह स्थिति कब तक रहेगी, कुछ पता नहीं।
छह माह से नहीं कराई रिफिलिंग
भीटी तहसील क्षेत्र के अढ़नपुर निवासी कमलेश वर्मा ने मायूसी भरे लहजे में कहा कि जब उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क कनेक्शन मिला था, तो बहुत खुशी हुई थी। लगा था कि अब चूल्हे से राहत मिल गई है, लेकिन जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई, वैसे वैसे खुशियां समाप्त होती रहीं। बीते छह माह से रसोई गैस सिलिंडर की रिफिलिंग नहीं कराई है। ऐसा इसलिए कि सिलिंडर का दाम इतना अधिक हो गया है कि रिफिलिंग कराने की हिम्मत नहीं रह गई है। ऐसे में अब फिर से चूल्हे की तरफ ही रुख करना पड़ा है। रसोई गैस सिलिंडर सिर्फ देखने के लिए रसोई घर में रखा हुआ है।
दाम बढ़ने से रिफिलिंग कराने की हिम्मत नहीं
जलालपुर तहसील क्षेत्र के सुरहुरपुर निवासी कुसुमा देवी ने कहा कि योजना के तहत निशुल्क कनेक्शन लेने के बाद परिवार खुश था। चूल्हे से तो निजात मिली ही थी, इसके साथ ही धुआं से घर काला नहीं हो रहा था। लेकिन पता नहीं था कि शीघ्र ही खुशियां समाप्त होने वाली हैं। फिर से चूल्हे पर खाना बनाना पड़ेगा। महंगाई इतनी अधिक है कि सिलेंडर रिफिलिंग कराने की हिम्मत नहीं है। लगभग छह माह हो गए रिफिलिंग कराए हुए। महंगाई इतनी अधिक है कि पेट भरना ही मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रिफिलिंग कैसे करा सकते हैं।