बीते तीन माह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आग लगने की 372 घटनाएं हुईं। इनमें लगभग पौने दो करोड़ रुपये की संपत्ति जहां जलकर राख हो गई, वहीं तीन लोगों की जान भी चली गईं। इसके अलावा लगभग दो दर्जन मवेशी भी आग की भेंट चढ़ गए। इन सबके बीच अग्नि पीड़ितों को उचित मुआवजा अब तक नहीं दिलाया जा सका है।
न तो आग में हुए नुकसान का समुचित सर्वे हुआ और न ही नुकसान के सापेक्ष पीड़ितों को आर्थिक सहायता ही प्रदान की जा सकी है। तमाम अग्नि पीड़ित आर्थिक सहायता के लिए संबंधित अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं लेकिन इस तरफ अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
तापमान बढ़ने के साथ ही जिले में आग की वारदातों में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। कहीं शॉर्ट-सर्किट तो कहीं अज्ञात कारणों से भीषण आग लग रही है। ऐसी घटनाओं में बड़ी संपत्ति को नुकसान हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार बीते तीन माह में जिले में आग लगने की कुल 372 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 255 परिवारों के घर का पूरा सामान जलकर राख हो चुका है।
इसके अलावा 600 बीघा से अधिक गेहूं व अरहर की फसल भी राख हो चुकी है। आग की चपेट में आने से इन तीन माह में एक करोड़ 70 लाख 86 हजार 500 रुपये की संपत्ति नष्ट हो चुकी है, जबकि आग की चपेट में आने से तीन लोगों की झुलसकर मौत हो चुकी है। इसके अलावा दो दर्जन से अधिक मवेशियों की भी झुलसने से मौत हो चुकी है।
अग्नि पीड़ितों को क्षति के आधार पर सहायता दिए जाने का प्रावधान है। उनको दैवी आपदा या फिर अहेतुक सहायता दिए जाने की व्यवस्था है। यह अलग बात है कि इन योजनाओं का अग्नि पीड़ितों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उनको आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने को लेकर तहसीलों में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक दर्जन से अधिक आग की ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जिनका सर्वे करने ही राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंच सका।
इसके अलावा जिन क्षति का आंकलन किया भी गया है, उनमें बड़े पैमाने पर मनमानी की गई है। नतीजतन अग्नि पीड़ितों को क्षति के सापेक्ष उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। भीटी तहसील क्षेत्र के रामउजागिर व संतराम ने कहा कि हाईटेंशन तार की चिंगारी से चार बीघा गेहूं फसल राख हो गई थी। सूचना पर भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं आए।
अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। मालीपुर में बीते दिनों एक दर्जन से अधिक घर राख हो गए थे। सर्वे के बावजूद पीड़ितों को उचित मुआवजा नहीं मिल सका। सर्वेश व जगराम ने कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका है। टांडा तहसील क्षेत्र में बीते दिनों निषाद बस्ती में लगी आग से दो दर्जन से अधिक घर राख हो गए थे।
पीड़ित रामचंदर निषाद व मस्तराम ने कहा कि उन्हें मुआवजा तो मिला लेकिन वह क्षति के सापेक्ष काफी कम था। अपर जिलाधिकारी रामसूरत पांडेय ने बताया कि आग लगने की घटनाओं में प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता नियमानुसार दी गई है।
शासन से जो दिशा-निर्देश हैं, उनके अनुरूप आर्थिक सहायता दी गई है। यदि किसी मामले में मदद नहीं पहुंच पाई है तो जांच कराई जाएगी।