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घंटों इंतजार के बाद लग पाया कोरोना टीका

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अंबेडकरनगर के अकबरपुर सीएचसी पर वैक्सीनेशन के लिए इस तरह से लगी नागरिकों की भारी भीड़। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। कोरोना टीकाकरण के विशेष महाअभियान में मंगलवार को सभी केंद्रों पर गहमागहमी रही। 112 बूथों पर 33 हजार नागरिकों को टीका लगाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था, उसे बेहतर ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी। कई घंटे इंतजार के बाद लगभग सभी नागरिकों को टीका लग पाया। गर्मी व उमस में घंटों के इंतजार से नागरिकों को दिक्कतोें का सामना करना पड़ा। टीकाकरण का जायजा लेने डीएम सैमुअल पॉल एन भी निकले। उन्होंने कई अस्पतालों में पहुंचकर नागरिकों व कर्मचारियों से जरूरी फीडबैक लिया।
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जिले में अक्सर होने वाली टीके की कमी के बीच शासन के निर्देश पर मंगलवार को कोरोना टीकाकरण का महाअभियान चला। यूं तो यह अभियान पहले से तय था, लेकिन इसके लिए जिन जरूरी प्रबंधों को किया जाना था, उनमें कमी देखने को मिली। अस्पतालों में अतिरिक्त काउंटर बनाकर टीका लगवाने पहुंचे नागरिकों की मुसीबत कम की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। नतीजा यह हुआ कि जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक के बूथों पर अपराह्न तक गहमागहमी का माहौल देखने को मिला। चूंकि कई दिन पहले से ही टीकाकरण केंद्रों पर टीका लगवाने के लिए नागरिकों की भीड़ उमड़ रही थी। इसलिए विशेष अभियान के दौरान और ज्यादा भीड़ आने की संभावना सच साबित हुई।
हालत यह थी कि जिला अस्पताल से लेकर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में टीका लगवाने के लिए गहमागहमी रही। टांडा, आलापुर, भीटी, कटेहरी, मालीपुर, राजेसुल्तानपुर, बसखारी आदि क्षेत्रों में बूथों पर हालात बेकाबू हो रहे थे। इन्हें संभालने के लिए थाना प्रभारियों को जिम्मेदारी उठानी पड़ी। पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे अप्रिय स्थिति उत्पन्न न होने पाए। मंगलवार को विशेष महाअभियान में कुल 112 बूथ पर 33 हजार नागरिकों को टीका लगाया जाना था। बूथों पर काउंटर कम होने ये सुबह से लेकर अपराह्न तक अफरातफरी के माहौल से नागरिकों को जूझना पड़ा। सोशल डिस्टेंसिंग सभी बूथों पर तार-तार होती नजर आई।
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सुबह सात बजे से ही लग गई थी लाइन
जिला अस्पताल में अमर उजाला टीम सुबह साढ़े दस बजे पहुंची तो वहां लंबी लाइन लग चुकी थी। गर्मी के चलते नागरिकों का हाल बेहाल था। मातृ एवं शिशु केंद्र के गेट पर पुलिस कर्मी तैनात थे। गेट के बाहर गहमागहमी का माहौल देखने को मिला। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि दस-दस नागरिकों को गेट के अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। इसके बाद वे संबंधित कक्षों में पहुंचकर टीका लगवा रहे थे। कई नागरिकों ने यहां बताया कि वे सुबह करीब सात बजे ही जिला अस्पताल पहुंच गए। ऐसा इसलिए जिससे तेज धूप होने के पहले टीका लगवाकर अपने घर पहुंच सकें। कुछ लोग इसमें कामयाब तो हुए, लेकिन उन्हें भी घंटों लाइन में लगने को विवश होना पड़ा। यहां कई नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विशेष अभियान में काउंटरों की संख्या दोगुना से ज्यादा करनी चाहिए थी।
कड़ी धूप में घंटों लगानी पड़ी लाइन
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय अकबरपुर में टीम दोपहर 12 बजे करीब पहुंची तो वहां अफरातफरी दिखी। महिलाओं व पुरुषों की लंबी लाइन लगी हुई थी। लाइन में खड़े नागरिक इस बात को लेकर परेशान थे कि टीकाकरण तेजी से नहीं हो पा रहा है। यहां चार से पांच घंटे के लंबे इंतजार के बाद तमाम नागरिकों को टीका लग पाया। कड़ी धूप में घंटों खड़े रहने से लाइन में लगे नागरिक थोड़ी-थोड़ी देर पर बैठ जा रहे थे। कई नागरिक प्यास से परेशान दिखे, लेकिन लाइन से हट जाने पर फिर से पीछे लगने का संकट खड़ा था। ऐसे में भूख-प्यास को बर्दाश्त कर नागरिकों ने जैसे-तैसे टीका लगवाया। यहां भी नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग को पहले से तैयारी पूरी करते हुए बूथों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। ऐसा होता तो इतनी मारामारी न होती।
लोगों ने अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी
बनगांव निवासी खुशीराम टीका लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे थे। वे कई नागरिकों के साथ यहां आए थे। बोले कि सुबह सात बजे ही हम लोग आ गए थे। करीब साढ़े दस बजे प्रवेश तो मिल गया, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते लगभग आधे घंटे बाद टीका लग पाया। कुर्की बाजार निवासी कालीदास ने बताया कि गहमागहमी को देखते हुए मुझे साढ़े तीन घंटे तक लाइन में खड़े रहना पड़ा। बताया कि मैं सोमवार को भी जिला अस्पताल आया था, लेकिन वैक्सीन न होने के कारण मायूस होकर लौटना पड़ा था। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय अकबरपुर में टीका लगवाने पहुंचे डल्लापुर निवासी राजेश कुमार ने कहा कि ऐसे अफरातफरी के माहौल में टीकाकरण नहीं होना चाहिए। इससे टीका लगवाने आ रहे नागरिकों की तबीयत भी बिगड़ सकती है। सिझौलिया से आए समशेर ने कहा कि यहां ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जो घंटों लाइन में न खड़ा हो। यह स्थिति चिंताजनक है। बूथों की संख्या बढ़ी होती तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी अच्छे से हो पाता।
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