इन कोचिंग सेंटरों द्वारा कोर्स पूरा कराने एवं परीक्षा की तैयारी कराने के नाम पर छात्र-छात्राओं से मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। इनमें तमाम कोचिंग सेंटर ऐसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। इनके विरुद्ध शासन के तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी से प्रारंभ हो रही हैं। प्रयोगात्मक परीक्षाएं प्रारंभ भी हो चुकी हैं। पंचायत चुनाव के चलते जिले के ज्यादातर विद्यालयों में प्रमुख विषयों जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी व वाणिज्य के कोर्स आधे अधूरे हैं। इससे परीक्षा में अच्छे हासिल करने के लिए छात्र छात्राओं में काफी तनाव है।
समय पर कोर्स पूरा करने एवं परीक्षा की समुचित तैयारी करने के लिए ऐसे में छात्र छात्राओं को कोचिंग सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। छात्र छात्राओं व उनके अभिभावकों की मजबूरी का लाभ जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गली गली खुले कोचिंग सेंटर संचालक बढ़ चढ़कर उठा रहे हैं। समय पर कोर्स पूरा कराने एवं परीक्षा की समुचित तैयारी कराने के नाम पर छात्र छात्राओं से मुंह मांगी रकम ली जा रही है।
जिले में जगह जगह धड़ल्ले से संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर अंकुश पाने को लेकर विभागीय अधिकारी भी तमाम शिकायतों व शासन के दिशा निर्देशों के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सके हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में मात्र 41 कोचिंग सेंटर संचालकों ने पंजीकरण करा रखा है।
वास्तविकता यह है कि जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में 400 से अधिक कोचिंग सेंटर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। शासन के सख्त निर्देश के बावजूद बगैर पंजीकरण के संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण कराने को लेकर विभागीय अधिकारी कोई कड़े कदम नहीं उठा सका।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक ऐसे कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई के लिए छापेमारी जैसा कोई अभियान विगत चार वर्षों में नहीं चलाया जा सका है। नतीजा यह है कि ऐसे कोचिंग सेंटर संचालकों द्वारा छात्र छात्राओं का जमकर आर्थिक शोषण किया जा रहा है।