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पहले होता था केले का आयात, अब हो रहा निर्यात

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अंबेडकरनगर। कभी दूसरे प्रांत से केला मंगाने वाला अंबेडकरनगर जिला अब दूसरे जिलों में केले की आपूर्ति कर रहा है। केले की खेती किसानों को इस कदर भाने लगी है कि मौजूदा समय में 600 से अधिक किसान ढाई सौ हेक्टेअर क्षेत्रफल में केले की खेती करने में जुटे हैं। प्रति बीघा करीब सवा लाख रुपया की कमाई से किसानों के चेहरों पर खुशी है। आस पड़ोस के जिलों में बढ़चढ़ कर हो रही केले की सप्लाई। किसानों को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपया के अनुदान का प्रोत्साहन भी मुहैया कराया जा रहा है।
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परंपरागत खेती के साथ ही अब किसानों का रुझान व्यवसायिक खेती की तरफ भी तेजी से बढ़ने लगा है। आय बढ़ाने के लिए किसान अब तकनीक की मदद से व्यावसायिक खेती करने पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसके चलते ही लगभग एक दशक पूर्व जिले में मात्र कुछ बीघा क्षेत्रफल में ही होने वाली केले की खेती अब फैल कर ढाई सौ हेक्टेयर क्षेत्र में फैल गयी है। इससे जुड़े 600 से अधिक किसान अब केले की खेती को ही बेहतर मान रहे हैं।
जिले में लगातार बढ़ रही केले की खेती के कारण ही जो फल व्यवसायी पहले भुसावल से केला मंगवाते थे, वह अब जिले में तैयार होने वाली केले की फसल को बाजार में बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं। एक जमाने में भुसावल से केला आयात करने वाले अंबेडकरनगर जिला वर्तमान में आजमगढ़, जौनपुर, बस्ती, अयोध्या व सुल्तानपुर जिलों में केले की सप्लाई कर रहा है। जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के अनुसार अन्य जनपद के किसान स्वयं ही जिले में पहुंचकर सीधे खेत से ही फसल की खरीददारी कर लेते हैं। फसल की गुणवत्ता के आधार पर प्रति कुंतल केला बिक्री से 1000 से 1400 रुपया आसानी से मिल जाते हैं।
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प्रति बीघा सवा लाख रुपये तक फायदा
केले की खेती करने वाले फरीदपुर के किसान जयप्रकाश वर्मा ने कहा कि वे बीते दस वर्षों से केले की खेती करते हैं। प्रति बीघा 90 हजार से एक लाख रुपये की लागत लगती है। बिक्री करने पर लगभग सवा लाख रुपये की बचत होती है। कहा कि एक बीघा में लगभग 800 पौधे लगाए जाते हैं। इनसे लगभग ढाई सौ कुंतल फसल तैयार होती है। सद्दरपुर निवासी डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि वह लगभग आठ वर्ष से केले की खेती कर रहे हैं। इससे व्यापक लाभ मिल रहा है। पहले लखनऊ से पौधे मंगाते थे लेकिन अब बीज मंगाकर स्वयं ही पौधे तैयार करते हैं। अहरिया के राजकुमार व सद्दरपुर के बिल्लाऊ वर्मा ने कहा कि केले की खेती से आय बढ़ी है। फसल की बिक्री करने के लिए भी इधर उधर नहीं भटकना पड़ता।
दो किस्तों में मिलता है अनुदान
जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के अनुसार केले की खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ाने के लिए अभियान चलाकर किसानों को जागरूक भी बनाया जा रहा है। केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए दो किस्तों में प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपया से अधिक की राशि का अनुदान भी दिया जाता है।
तेजी से बढ़ रहा किसानों का रूझान
केले की खेती की तरफ जिले के किसानों का रुझान काफी तेजी से बढ़ रहा है। केले की खेती किसानों की आय को दुकाना बनाने का बेहतर माध्यम बन रही है। इसको बढ़ावा देने के लिए अनुदान राशि भी मुहैया करायी जा रही है।
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डॉ. संजय रस्तोगी, जिला उद्यान अधिकारी
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