बसखारी, अंबेडकरनगर। सफलता की पोशाक यूं ही नहीं मिलती, इसे मेहनत के धागे से बुनना पड़ता है। यह पंक्तियां अंकित के लक्ष्य पर सटीक साबित हो रही हैं। मां-बाप के सपने को पूरा करने का लक्ष्य तय कर सफलता की डगर पर आगे बढ़े हरसम्हार के लाल ने आखिरकार ऊंचाइयां छू लीं। उनकी सफलता पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 509 वीं रैंक हासिल करने पर अमित यादव को दिन भर फोन पर बधाइयां देने वालों का सिलसिला जारी रहा। यह अमित का दूसरा प्रयास था। इससे पहले उन्होंने दो वर्ष पूर्व पहले प्रयास में 756वीं रैंक प्राप्त कर रेलवे में एआरएम (सहायक मंडल रेल प्रबंधक) पद पर अपनी सेवा शुरू की थी। मगर संतोष से अधिक समर्पण का भाव अमित के भीतर था।
उन्होंने लक्ष्य को ऊंचा रखा और फिर एक बार कड़ी मेहनत के साथ यूपीएससी में सफलता हासिल की। परिणाम घोषित होते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाइयों का तांता लग गया। अमित यादव की शिक्षा यात्रा भी संघर्षों से भरी प्रेरणादायक गाथा है। भवानी भीख लघु माध्यमिक विद्यालय हीरापुर से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 2011 में रांगेय राघव इंटर कॉलेज हंसवर से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बांदा से बीटेक किया और दिल्ली जाकर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए।
अमित के पिता पूर्णमासी यादव किसान हैं। उन्होंने कभी संतानों की शिक्षा से समझौता नहीं किया। उनका यह संघर्ष ही अमित की सबसे बड़ी पूंजी बनी। बड़े भाई दीपक यादव, जो बीएसएफ में सब-इंस्पेक्टर रहे और वर्तमान में एनएसजी कमांडो हैं, ने उन्हें प्रेरित किया और यही प्रेरणा उन्हें सिविल सेवा तक ले आई। वहां से अब अमित यादव जैसे आईपीएस अधिकारी की उपलब्धि यह साबित करती है कि परिस्थितियां नहीं, सोच और संघर्ष भविष्य गढ़ते हैं। भावुक होते हुए अमित ने कहा कि पिता की देन है कि आज वह इस मुकाम को हासिल किया है। कहा कि पिता एक सामान्य किसान हैं ऐसे में इस सफलता को हासिल करना आसान नहीं था।