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झालरों की रोशनी में मंद पड़े दीये

Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
AmbedkarNagar
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अंबेडकरनगर। दिवाली में चाइनीज झालरों की चमक इस वर्ष और तेज होने की उम्मीद है। वह भी तब जबकि गत वर्ष के मुकाबले सभी प्रकार की झालरों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। देशी विद्युत झालरों की तुलना में कम टिकाऊ होने के बावजूद अपने आकर्षक मॉडल के चलते यह आम लोगों के बीच ज्यादा पसंद की जा रही है। इन सब का नतीजा है कि मिट्टी के दीये की मांग लगातार घट रही है। इस बार कुछ सामाजिक संगठनों व अन्य लोगों ने मिट्टी के बने दीपक व मोमबत्ती आदि का ही प्रयोग दीपावली में करने की मुहिम चला रखी है। फिलहाल शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की बाजारें चाइनीज विद्युत झालरों से पटी पड़ी हैं।
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दिवाली का नाम सामने आते ही रोशनी की जगमगाहट सामने दिखती प्रतीत होती है। पूर्व में जहां मिट्टी के बने दीपक व मोमबत्ती के सहारे घरों व दुकानों को रोशन करने का दौर चलता था, वहीं बीते लगभग एक दशक से इसमें तेजी से कमी आई है। खासतौर पर पिछले 4-5 वर्षों में चाइनीज झालरों का दौर मजबूत हुआ है। मोमबत्ती व दीपक को जलाने व उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की कवायद के बीच लोगों के लिए विद्युत झालरों का प्रयोग ज्यादा आसान नजर आने लगा। शुरू में तो देशी विद्युत झालरों का प्रयोग बढ़ा, लेकिन बाद में इस पर चाइनीज झालरों ने अपना कब्जा जमा लिया। नतीजा यह कि मिट्टी के दिए व मोमबत्ती का प्रयोग अब काफी कम हो गया है। पहले गांव गांव घर घर कुम्हार मिट्टी के दीपक लेकर पहुंचते थे, लेकिन अब यदा कदा ही दिखाई देते हैं। शहरी क्षेत्रों में भी इनकी दुकान लगातार सिमटती जा रही है। लेहड़ी गांव की नीलम देवी ने बताया कि परिवार की परंपरा को निभाने के लिए इस व्यवसाय को अपनाए रखा गया है। 50 रुपये सैकड़ा मिट्टी का दीया बिक ता है, जबकि उपली, भूसी व मिट्टी खरीदने में सैकड़ों रुपए लग जाते हैं। बस किसी तरह लागत निकल पाती है। इसी व्यवसाय से जुड़ी ज्ञानमती ने बताया कि सबसे बड़ी मुश्किल तोे मिट्टी मिलने में ही आती है। अब तो सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए ही लोग दीपक व अन्य सामान खरीदते हैं।
कुम्हार त्रिभुवन, घनश्याम व राधेश्याम कहते हैं कि कुम्हारी व्यवसाय का सबसे ज्यादा नुकसान चाइनीज झालरों ने पहुंचाया है। इसकी बिक्री पर सरकार को रोक लगानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक कहते हैं कि चाइनीज झालर से कुम्हारी व्यवसाय को जो चोट पहुंची है, उस पर मरहम लगाने के लिए चाइनीज झालरों की बिक्री को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उधर इन सब के बीच शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में चाइनीज झालरों की भरमार हो गई है।
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