अंबेडकरनगर। जिले के 585 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 65 हजार छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प अभियान के बावजूद संबंधित विद्यालयों में अब तक चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। समस्या उस समय खड़ी हो जाती है, जब एमडीएम योजना के तहत छात्र-छात्राओं के भोजन के दौरान आवारा पशु वहां पहुंच जाते हैं। ऐसे में शिक्षक-शिक्षिकाओं के समक्ष समस्या यह हो जाती है कि वे बच्चों को ऐसे पशुओं से बचाएं या फिर भोजन को। इतना ही नहीं, बाउंड्रीवाल न होने से सुबह जब शिक्षक-शिक्षिकाएं व छात्र-छात्राएं विद्यालय पहुंचते हैं, तो बरामदे में आवारा पशु बैठे रहते हैं। इन्हें वहां से हटाने व उनके द्वारा फैलाई गई गंदगी को दूर करने के बाद ही शिक्षण कार्य प्रारंभ हो पाता है।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों का आकर्षण विद्यालय के प्रति बना रहे, इसके लिए शासन की ओर से विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। न सिर्फ उन्हें दोपहर का खाना उपलब्ध कराया जाता है, बल्कि ड्रेस, जूता, मोजा, स्कूली बैग व किताबें निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका बढ़-चढ़कर परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रह छात्र-छात्राओं को लाभ भी मिल रहा है। इन सबके बावजूद परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के 585 परिषदीय विद्यालयों में अब तक बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं हो सका है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 1582 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें 997 विद्यालयों में तो बाउंड्रीवाल बनी है, लेकिन 585 परिषदीय विद्यालयों में बाउंड्रीवाल का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। इससे इन विद्यालयों में पढ़ रहे 65 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
भोजन के दौरान होती अक्सर होती है समस्या
जिन 585 परिषदीय विद्यालयों में अब तक चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है, वहां सबसे अधिक समस्या उस समय होती है, जब एमडीएम योजना के तहत दोपहर का भोजन छात्र-छात्राएं कर रहे होते हैं। भोजन के दौरान आवारा पशुओं के वहां पहुंचने से शिक्षक-शिक्षिकाओं के समक्ष यह समस्या खड़ी हो जाती है कि वह बच्चों को आवारा पशुओं को बचाएं या फिर भोजन को। हालत यह है कि ज्यादातर विद्यालयों में दोपहर के भोजन के दौरान संबंधित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं डंडा लेकर रखवाली करने को मजबूर होते हैं। इसके अलावा सुबह के समय भी उस समय मुश्किल खड़ी हो जाती है, जब विद्यालय पहुंचने पर बरामदे में आवारा पशु बैठे मिलते हैं। ऐसा होने पर पढ़ाई प्रारंभ करने से पहले न सिर्फ आवारा पशुओं को भगाना पड़ता है, बल्कि पशुओं की ओर से कई गई गंदगी को भी हटाना पड़ता है।
स्थापना 1939 में, बाउंड्रीवाल अब तक नहीं बनी
अकबरपुर विकास खंड में स्थित प्राथमिक विद्यालय कटरिया सम्मनपुर की स्थापना 1939 में हुई थी। जिला मुख्यालय से महज पांच किमी की दूरी पर स्थित इस विद्यालय ने जिले को शिक्षक, कमिश्नर व चिकित्सक दिए हैं। मौजूदा समय में इस विद्यालय में 50 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। परिषदीय विद्यालयों की दशा व दिशा सुधारने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प अभियान बढ़-चढ़कर चलाया जा रहा है, लेकिन इस विद्यालय में इस योजना का लाभ अब तक नहीं पहुंच सका है। लगभग 82 वर्ष होने को हैं, लेकिन अब तक चहारदीवारी का निर्माण तक नहीं हो सका है। इससे अक्सर विद्यालय में आवारा पशुओं के पहुंचने से असहज स्थिति उत्पन्न होती रहती है। प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने बताया कि लगभग प्रतिमाह शासन की रिपोर्ट में बाउंड्रीवाल न होने की जानकारी दी जाती है।
मार्च से पहले बन जाएगी बाउंड्रीवाल
जिले में 585 परिषदीय विद्यालयों में बाउंड्रीवाल नहीं है। मार्च से पहले पहले संबंधित विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण कर लिया जाएगा। इसके लिए संबंधित ग्राम प्रधान को जरूरी दिशा निर्देश दिया गया है।
- भोलेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए