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चीनी मिल की उदासीनता से गन्ना किसानों का झटका

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मिझौड़ा (अंबेडकरनगर)। चीनी मिल अकबरपुर से जुड़े गन्ना किसानों की मुश्किलें पर्ची न मिलने से दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। पर्ची के अभाव में गन्ना समय से न बिक पाने के चलते जहां किसानों को दूसरी फसल का लाभ लेने से वंचित होना पड़ रहा है, वहीं गन्ना बिक्री में हो रही और विलंब किसानों पर भारी पड़ रही है। किसानों की शिकायत के बावजूद चीनी मिल प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
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गौरतलब है कि महरुआ क्षेत्र चीनी मिल मिझौड़ा के नजदीक है। इसके चलते इस क्षेत्र के किसान गन्ने की खेती भी बड़े पैमाने पर करते हैं। चीनी मिल प्रबंधन की लापरवाही के चलते किसानों को इन दिनों मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की पेड़ी गन्ना फसल खेतों में खड़ी है, लेकिन पर्ची नहीं मिल पा रही है। गन्ने का खेत खाली हो जाने पर दूसरी फसल का लाभ पाने की उम्मीद लगाए किसानों को इससे झटका लगा ही है, अब और अधिक बिलंब होने से किसानों को दिक्कत हो रही है। क्षेत्र में छुट्टा मवेशी खेतों में खड़ी गन्ना फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। महरुआ के संजीव मिश्र का कहना है कि उनके पास चार बीघा से अधिक गन्ने की फसल है। इसमें दो बीघा के करीब पेड़ी गन्ना है। परंतु अब तक उन्हें सिर्फ एक पर्ची मिल सकी है। शेष गन्ना खेतों में खड़ी है। किसान रामअचल व रामसूरत भी पेड़ी गन्ने की पर्ची के लिए मिल का चक्कर काट रहे हैं। किसान जगदंबा, अभिमन्यु सिंह, राजकुमार व महेन्द्र यादव भी पर्ची न मिलने से खासे परेशान हैं।
किसान गौरीशंकर पांडेय के पास भी करीब छह बीघा गन्ने की फसल है। इसमें करीब ढाई बीघा गन्ना पेड़ी है। अब तक एक भी पर्ची उन्हें मुहैया नहीं हो सकी थी। उनका कहना है कि उम्मीद थी कि समय से पर्ची मिल जाएगी तो खेत खाली हो जाएगा। इसमें गेहूं या फिर सरसों आदि की दूसरी फसल का लाभ वह आसानी से ले लेंगे। परंतु पर्ची न मिलने से न सिर्फ उम्मीदें टूटी हैं, बल्कि हजारों रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। उधर चीनी मिल के उप गन्ना प्रबंधक अरविंद सिंह ने बताया कि कैलेंडर के अनुरूप पर्ची दी जा रही है।
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